छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के निलंबन से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि निलंबन के 90 दिनों के भीतर आरोप पत्र (चार्जशीट) जारी नहीं किया जाता और न ही निलंबन अवधि का विधिसम्मत विस्तार किया जाता है, तो निलंबन स्वतः समाप्त माना जाएगा।
मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की एकलपीठ ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के निलंबित अधिकारी एम.के. खरे की याचिका स्वीकार कर उनके निलंबन आदेश को निरस्त कर दिया तथा उन्हें तत्काल सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता की ओर से प्रस्तुत तर्कों में कहा गया कि निलंबन आदेश जारी होने के बाद विभाग ने निर्धारित 90 दिनों की अवधि के भीतर न तो आरोप पत्र जारी किया और न ही निलंबन बढ़ाने संबंधी कोई वैधानिक आदेश पारित किया। इस आधार पर निलंबन को अवैध बताया गया।

सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 9(5)(a) का हवाला देते हुए कहा गया कि निर्धारित समयसीमा के भीतर चार्जशीट जारी न होने पर कर्मचारी बहाली का अधिकार प्राप्त कर लेता है।
राज्य शासन की ओर से भी यह स्वीकार किया गया कि विभाग ने 90 दिनों के भीतर न तो आरोप पत्र जारी किया और न ही निलंबन अवधि का विस्तार किया। अदालत ने इसे निर्विवाद तथ्य मानते हुए कहा कि नियमों का पालन नहीं किया गया है, इसलिए निलंबन आदेश प्रभावी नहीं रह सकता।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने निलंबन आदेश को समाप्त मानते हुए याचिकाकर्ता को तत्काल सेवा में वापस लेने के निर्देश दिए।
