बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में सहायक पशु चिकित्सा सर्जन डॉ. नारायण प्रसाद पांडेय की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की पीठ ने स्पष्ट किया कि आरोपी की संपत्ति के स्रोत और आय से जुड़े बचाव के तर्कों की जांच ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
मामले के अनुसार, आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ACB) ने डॉ. पांडेय के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में वर्ष 2005 में मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान जगदलपुर और रायपुर स्थित आवासों से मिली संपत्तियों का कुल अनुमानित मूल्य लगभग 57.85 लाख रुपये आंका गया था। अभियोजन का आरोप था कि ये संपत्तियां उनकी ज्ञात आय के अनुपात में अधिक थीं।
आरोपी ने संपत्तियों के मूल्यांकन, परिवार के सदस्यों की आय को शामिल करने और जांच में 13 वर्ष से अधिक की देरी पर सवाल उठाते हुए आरोप निरस्त करने की मांग की थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने माना कि इन मुद्दों पर विस्तृत विचारण आवश्यक है और उपलब्ध सामग्री आरोप तय करने के लिए पर्याप्त है।
न्यायालय ने 30 नवंबर 2019 को विशेष न्यायाधीश द्वारा भारतीय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(e) सहपठित धारा 13(2) के तहत आरोप तय करने के आदेश को बरकरार रखा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस निर्णय की टिप्पणियां मुकदमे के अंतिम फैसले को प्रभावित नहीं करेंगी।
