बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रेप और पॉक्सो मामले में दोषसिद्ध आरोपी अश्वनी चंद्राकर को बरी कर दिया है। जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकल पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि घटना के समय पीड़िता 18 वर्ष से कम उम्र की थी। पीड़िता की जन्मतिथि को लेकर स्कूल रिकॉर्ड, उसके बयान और ऑसिफिकेशन रिपोर्ट में विरोधाभास पाया गया।
कोर्ट ने यह भी पाया कि पीड़िता की शिकायत घटना के करीब 10 दिन बाद दर्ज हुई और उसकी मौसी ने कथित घटना की जानकारी मिलने की बात का समर्थन नहीं किया। मेडिकल जांच में कोई आंतरिक या बाहरी चोट नहीं मिली तथा एफएसएल रिपोर्ट में भी वीर्य या मानव शुक्राणु नहीं मिले। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन परिस्थितियों को अकेले निर्णायक नहीं माना जा सकता, लेकिन अन्य विसंगतियों के साथ इनसे अभियोजन की कहानी पर संदेह उत्पन्न होता है।
हाईकोर्ट ने कहा कि “अभियोजन पक्ष आरोपी के अपराध को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा” और संदेह का लाभ आरोपी को दिया जाना आवश्यक है। कोर्ट ने 12 अगस्त 2021 के ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए आरोपी को IPC की धारा 376(1), 506-II और पॉक्सो एक्ट की धारा 4 के आरोपों से बरी कर दिया।
