छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने डॉक्टरों की बरी होने की सजा पलटी, MTP Act और IPC 315 में दोषी ठहराया

JUSTICE NARENDRA KUMAR VYAS, JUDGE HIGH COURT OF CHHATTISGARH

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कोरबा के दीपका स्थित लाइफकेयर अस्पताल से जुड़े अवैध गर्भपात मामले में तीन आरोपियों की बरी होने की स्थिति को आंशिक रूप से पलट दिया है। जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की पीठ ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) Act, 1971 की धारा 5 और IPC की धारा 315 के तहत अभियोजन का मामला साबित मानते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप किया।

मामले में वर्ष 2011 में अस्पताल के निरीक्षण के दौरान अलग-अलग उम्र के कई भ्रूण और गर्भपात से संबंधित उपकरण मिलने की बात सामने आई थी। पुलिस ने FIR दर्ज कर चार्जशीट दाखिल की थी, जिसके बाद वर्ष 2016 में ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों को बरी कर दिया था। राज्य ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

हाईकोर्ट ने हालांकि PC & PNDT Act की धारा 22(3) के आरोप में बरी किए जाने को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि इस कानून के तहत धारा 28 में निर्धारित विशेष प्रक्रिया का पालन जरूरी है और केवल पुलिस की FIR व चार्जशीट के आधार पर संज्ञान नहीं लिया जा सकता।

कोर्ट ने आरोपियों की सजा पर सुनवाई के लिए मामले को 12 अक्टूबर 2026 को सूचीबद्ध किया है।