दिल्ली SIR ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर CEO की सफाई, नाम नहीं होने का मतलब अंतिम रूप से अपात्र होना नहीं

ECI _ Election Commission of India

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय ने SIR के तहत जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्टों पर स्पष्टीकरण जारी किया है। कार्यालय ने कहा कि 31 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट निर्वाचक नामावली निर्धारित प्रक्रिया और सत्यापन व्यवस्था के आधार पर तैयार की गई है।

मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले जोड़े गए करीब 40 प्रतिशत नाम SIR की ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हैं। यह मामला उस विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा बताया गया, जहां आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता अरविंद केजरीवाल मामूली अंतर से चुनाव हार गए थे।

दिल्ली CEO कार्यालय ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का नाम ड्राफ्ट निर्वाचक नामावली में शामिल नहीं होना अपने आप में उसकी अंतिम रूप से अपात्रता तय नहीं करता। कार्यालय के अनुसार, किसी एक पुनरीक्षण अवधि में जोड़े गए नामों की संख्या की तुलना बाद की ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए नामों से करने मात्र से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि किसी नाम को गलत या दुर्भावनापूर्ण तरीके से हटाया गया है।

निर्वाचन कार्यालय ने कहा कि प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच निर्धारित पात्रता शर्तों, क्षेत्रीय सत्यापन, संबंधित दस्तावेजों और कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर की जानी आवश्यक है। इसलिए केवल आंकड़ों की तुलना के आधार पर मतदाता सूची में किसी नाम के शामिल न होने को गलत प्रक्रिया का परिणाम मानना उचित नहीं होगा।

दिल्ली CEO ने यह भी बताया कि निर्वाचक नामावली एक निरंतर अद्यतन होने वाला वैधानिक रिकॉर्ड है। इसमें समय-समय पर विभिन्न कारणों से बदलाव होते रहते हैं। इनमें मतदाता का निवास स्थान बदलना, मृत्यु, एक से अधिक स्थानों पर नाम दर्ज होना, पात्रता संबंधी शर्तों को पूरा नहीं करना तथा कानून के तहत निर्धारित अन्य आधार शामिल हो सकते हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की इस सफाई का उद्देश्य SIR ड्राफ्ट मतदाता सूची में नामों के शामिल नहीं होने को लेकर उठे सवालों की स्थिति स्पष्ट करना है। कार्यालय ने संकेत दिया है कि किसी भी नाम की स्थिति का आकलन संबंधित रिकॉर्ड, दस्तावेज और निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि केवल पिछले और वर्तमान निर्वाचक नामावली के आंकड़ों की तुलना के आधार पर।