बीमा राशि नहीं मिलने से मानसिक और शारीरिक पीड़ा, उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को 9.60 लाख रुपये भुगतान का दिया आदेश

Consumer Protection

बिलासपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी को बीमाधारक के परिवार को 9,60,749 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है। आयोग ने माना कि मेडिकल और मृत्यु दावा राशि का भुगतान नहीं करना सेवा में कमी है, जिससे उपभोक्ता को मानसिक एवं शारीरिक पीड़ा का सामना करना पड़ा।

मामला सिंधी कॉलोनी, बिलासपुर निवासी जितेंद्र खुशलानी की ओर से दायर परिवाद से जुड़ा है। परिवाद के अनुसार उनकी माता आरती खुशलानी ने एचडीएफसी लाइफ संचय प्लस योजना के तहत जीवन बीमा पॉलिसी ली थी, जिसमें चिकित्सा बीमा और मृत्यु दावा जोखिम भी शामिल था। दिसंबर 2021 में उनकी तबीयत खराब होने पर रायपुर और बाद में मुंबई में इलाज कराया गया। उपचार के दौरान लाखों रुपये का खर्च आया, लेकिन बीमा कंपनी ने दावा राशि का भुगतान करने से इनकार कर दिया।

परिवादकर्ता की माता का 24 फरवरी 2022 को निधन हो गया, जिसके बाद मृत्यु दावा राशि के लिए भी आवेदन किया गया। कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि पॉलिसी लेते समय मेडिकल हिस्ट्री छिपाई गई थी।

आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि बीमा कंपनी सेवा में कमी साबित हुई है। आयोग ने कंपनी को 45 दिनों के भीतर चिकित्सा बीमा मद में 4,32,057 रुपये, मृत्यु दावा मद में 5,27,692 रुपये, कुल 9,60,749 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया। साथ ही मानसिक एवं शारीरिक पीड़ा के लिए 10,000 रुपये और वाद व्यय के रूप में 5,000 रुपये अतिरिक्त देने के निर्देश दिए गए।

आयोग का यह फैसला अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल तथा सदस्यगण पूर्णिमा साहू और आलोक कुमार पाण्डेय की पीठ ने सुनाया।