छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने मकान निर्माण से जुड़े एक विवाद में उपभोक्ता द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग के फैसले को बरकरार रखा है। आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता बिल्डर के खिलाफ सेवा में कमी (Deficiency in Service) साबित करने में असफल रहा।
मामला रायपुर निवासी प्रभात शर्मा और बिल्डर व रियल एस्टेट एजेंट प्रदीप कुमार शर्मा के बीच हुए मकान निर्माण समझौते से जुड़ा था। शिकायतकर्ता का आरोप था कि उसने 1,000 वर्गफुट के प्लॉट पर 800 वर्गफुट मकान निर्माण के लिए 23.51 लाख रुपये के सौदे के तहत बड़ी राशि का भुगतान किया, लेकिन निर्धारित समय में निर्माण कार्य पूरा नहीं किया गया।
सुनवाई के दौरान राज्य आयोग ने पाया कि संबंधित भूमि का वास्तविक स्वामित्व किसी अन्य व्यक्ति के नाम था और प्रतिवादी भूमि मालिक नहीं था। आयोग ने यह भी कहा कि पक्षों के बीच हुआ निर्माण संबंधी समझौता स्पष्ट नहीं था तथा उसमें भूमि और निर्माण लागत का अलग-अलग विवरण भी नहीं दिया गया था।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों से यह भी स्पष्ट होता है कि शिकायतकर्ता ने अनुबंध के अनुसार पूरी भुगतान राशि नहीं दी थी। ऐसे में केवल निर्माण कार्य पूरा न होने के आधार पर बिल्डर को सेवा में कमी का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
राज्य आयोग ने माना कि जिला आयोग ने सभी दस्तावेजों और तथ्यों का सही मूल्यांकन किया था तथा उसके आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता। इसी कारण अपील को निरस्त कर दिया गया और जिला आयोग के 28 जुलाई 2025 के आदेश की पुष्टि कर दी गई।
यह फैसला संपत्ति और निर्माण संबंधी लेन-देन में स्पष्ट अनुबंध, स्वामित्व की जांच और भुगतान के उचित रिकॉर्ड रखने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
