रायपुर, 26 जुलाई। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ, छत्तीसगढ़ ने राज्य के पेंशनर्स और परिवार पेंशनर्स को महंगाई राहत (डीआर) का लाभ समय पर नहीं मिलने पर गहरी नाराजगी जताई है। महासंघ का कहना है कि कर्मचारियों से जुड़े लंबित मुद्दों पर कर्मचारी संगठनों की निष्क्रियता का सबसे अधिक नुकसान सेवानिवृत्त पेंशनर्स को उठाना पड़ रहा है।
महासंघ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जनवरी 2026 से महंगाई राहत की घोषणा किए जाने के बावजूद छत्तीसगढ़ के पेंशनर्स अब तक इसके लाभ से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई, स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते खर्च और दैनिक जरूरतों की वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि ने वरिष्ठ नागरिकों की आर्थिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। ऐसे में समय पर महंगाई राहत का भुगतान केवल सुविधा नहीं, बल्कि पेंशनर्स का वैधानिक अधिकार है।
महासंघ ने आरोप लगाया कि राज्य में कर्मचारी संगठन आपसी मतभेदों और कई गुटों में बंटे होने के कारण प्रभावी आंदोलन खड़ा नहीं कर पा रहे हैं। संगठन का कहना है कि मंत्रालयीन कर्मचारी भी अपने वेतन और भत्तों से जुड़े मुद्दों पर सरकार पर दबाव बनाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं करते, जबकि मजबूत कर्मचारी आंदोलन सरकार को निर्णय लेने के लिए बाध्य कर सकते हैं। महासंघ ने यह भी कहा कि पेंशनर्स संगठन भी बिखरे हुए हैं और उनके आंदोलनों का सरकार पर अपेक्षित प्रभाव नहीं पड़ता।
महासंघ ने मध्यप्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की सरकार कर्मचारियों को महंगाई भत्ते (डीए) का एरियर भी उपलब्ध करा रही है, जबकि छत्तीसगढ़ में कर्मचारी और पेंशनर्स दोनों अभी तक महंगाई राहत संबंधी आदेश का इंतजार कर रहे हैं। महासंघ के प्रदेश महामंत्री अनिल गोल्हानी और प्रवीण कुमार त्रिवेदी ने कहा कि कर्मचारी संगठनों को अपने कर्मचारियों के हितों की प्रभावी पैरवी करनी चाहिए थी, लेकिन उनकी उदासीनता का प्रतिकूल असर पेंशनर्स पर भी पड़ रहा है। उन्होंने राज्य सरकार से जल्द महंगाई राहत के आदेश जारी कर पेंशनर्स को उनका लंबित लाभ देने की मांग की।
