सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे को लगाई फटकार, कहा: ट्रेनों में भीड़ रोकें, टिकट गुम होने पर मुआवजा नहीं रोका जा सकता

Supreme Court of India

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रेलवे को ट्रेनों में बढ़ती भीड़ रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने का निर्देश देते हुए कहा कि भीड़भाड़ के कारण यात्रियों की जान जाना गंभीर चिंता का विषय है। न्यायालय ने यह भी कहा कि केवल दुर्घटना के बाद टिकट नहीं मिलने के आधार पर मृतक को मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता।

न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति नोंगमेइकापम कोटिस्वर सिंह की पीठ ने 2015 में चलती ट्रेन से गिरकर मृत व्यक्ति की पत्नी की अपील स्वीकार करते हुए रेलवे को चार सप्ताह के भीतर 8 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया गया तो दावा याचिका दायर होने की तिथि से 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रेलवे के नियमों में भीड़ नियंत्रण के पर्याप्त प्रावधान मौजूद हैं, लेकिन उनका प्रभावी पालन नहीं हो रहा है। अदालत ने अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती कर भीड़ प्रबंधन और यात्री सुरक्षा को मजबूत करने की भी सलाह दी।

पीठ ने रेलवे मैनुअल में प्रयुक्त “सेकेंड क्लास पैसेंजर” शब्द पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि श्रेणी कोच की हो सकती है, यात्री की नहीं। ऐसा शब्द संविधान में निहित समानता के सिद्धांत के अनुरूप नहीं है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि रेलवे अधिनियम की धारा 124ए के तहत दुर्घटना मुआवजा “नो-फॉल्ट” आधार पर दिया जाता है। यदि मृतक के वैध टिकट होने का प्रथमदृष्टया प्रमाण उपलब्ध है, तो केवल टिकट गुम हो जाने के कारण मुआवजा अस्वीकार नहीं किया जा सकता।