सीमा शुल्क, उत्पाद एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण का बड़ा फैसला: ग्लूकोमीटर मेडिकल उपकरण नहीं, रासायनिक विश्लेषण यंत्र; राजस्व विभाग की अपील खारिज

Central Excise and Service Tax Appellate Tribunal - CESTAT

सीमा शुल्क, उत्पाद एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (CESTAT) ने ग्लूकोमीटर के सीमा शुल्क वर्गीकरण को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राजस्व विभाग की अपील खारिज कर दी है। न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि ब्लड ग्लूकोज मॉनिटरिंग सिस्टम (ग्लूकोमीटर) का मुख्य कार्य रक्त में ग्लूकोज की रासायनिक जांच करना है, इसलिए इसे कस्टम्स टैरिफ हेडिंग (CTH) 9027 के अंतर्गत “रासायनिक विश्लेषण करने वाले उपकरण” के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा, न कि CTH 9018 के अंतर्गत चिकित्सा उपकरण के रूप में।

यह मामला लाइफ स्कैन मेडिकल डिवाइसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा आयात किए गए “वन टच सिलेक्ट सिंपल ब्लड ग्लूकोज मॉनिटरिंग सिस्टम” और “वन टच सिलेक्ट प्लस सिंपल ब्लड ग्लूकोज मॉनिटरिंग सिस्टम” से जुड़ा था। कंपनी ने इन उत्पादों को CTH 9027 के तहत घोषित किया था, जबकि सीमा शुल्क विभाग का कहना था कि इन्हें CTH 9018 के तहत चिकित्सा निदान उपकरण माना जाना चाहिए। इसी विवाद के चलते विभाग ने अंतर शुल्क और ब्याज की मांग की थी।

मामले की सुनवाई के दौरान राजस्व विभाग ने तर्क दिया कि ग्लूकोमीटर चिकित्सा निदान में उपयोग होने वाला उपकरण है, इसलिए इसका वर्गीकरण चिकित्सा उपकरणों वाली श्रेणी में होना चाहिए। विभाग ने यह भी कहा कि आयुक्त (अपील) ने सीमा शुल्क अधिसूचना, HSN व्याख्यात्मक टिप्पणियों और सामान्य व्याख्या नियमों का गलत उपयोग किया है। दूसरी ओर, आयातक ने बॉम्बे हाईकोर्ट और CESTAT के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि यह विवाद पहले ही तय हो चुका है और ग्लूकोमीटर को CTH 9027 के तहत ही वर्गीकृत किया गया है।

न्यायाधिकरण ने अपने फैसले में ग्लूकोमीटर की कार्यप्रणाली का विस्तार से विश्लेषण किया। पीठ ने कहा कि यह उपकरण रक्त के नमूने में रासायनिक एवं एंजाइम आधारित प्रतिक्रिया के माध्यम से ग्लूकोज की मात्रा का विश्लेषण करता है और उसी के आधार पर परिणाम प्रदर्शित करता है। इसलिए इसका मूल कार्य रासायनिक विश्लेषण करना है। केवल इस कारण कि किसी उपकरण का उपयोग चिकित्सा क्षेत्र में होता है, उसे स्वतः चिकित्सा उपकरणों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

CESTAT ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा, “ग्लूकोमीटर द्वारा रक्त में ग्लूकोज स्तर का मापन स्वयं एक निदान प्रक्रिया है।” न्यायाधिकरण ने आगे कहा कि “उपकरण की विश्लेषणात्मक क्षमता उसके चिकित्सीय उपयोग से अलग नहीं है, बल्कि उसी का अभिन्न हिस्सा है।”

पीठ ने यह भी कहा कि इसी मुद्दे पर पहले Bayer Pharmaceuticals, Ascensia Diabetes Care India Pvt. Ltd. तथा Abbott Healthcare Pvt. Ltd. मामलों में भी यही कानूनी सिद्धांत अपनाया जा चुका है। इन फैसलों को बॉम्बे हाईकोर्ट ने बरकरार रखा था और बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने भी विभाग की चुनौतियों को खारिज कर दिया था। ऐसे में अब यह कानूनी स्थिति पूरी तरह स्थापित हो चुकी है कि ग्लूकोमीटर का वर्गीकरण CTH 9027 के अंतर्गत ही होगा।

न्यायाधिकरण ने कहा कि आयुक्त (अपील) द्वारा आयातक के पक्ष में दिया गया आदेश पूरी तरह सही था और उसमें हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। परिणामस्वरूप राजस्व विभाग की अपील खारिज कर दी गई।

यह फैसला चिकित्सा उपकरणों के आयातकों, सीमा शुल्क अधिकारियों और उद्योग जगत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह सिद्धांत और मजबूत हुआ है कि किसी उत्पाद का सीमा शुल्क वर्गीकरण उसके वास्तविक वैज्ञानिक एवं तकनीकी कार्य के आधार पर किया जाएगा, न कि केवल उसके उपयोग के आधार पर। भविष्य में ग्लूकोमीटर और इसी प्रकार के विश्लेषणात्मक उपकरणों से जुड़े सीमा शुल्क विवादों में यह निर्णय महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा।