ऑनलाइन रम्मी में ₹30 लाख का घाटा, फिर भी लगा ₹3.54 करोड़ का टैक्स; आईटीएटी ने आयकर विभाग का आदेश किया रद्द

Income Tax Appellate Tribunal - ITAT

हैदराबाद स्थित आयकर अपीलीय अधिकरण (आईटीएटी) ने ऑनलाइन रम्मी खेलने वाले एक करदाता को बड़ी राहत देते हुए ₹3.54 करोड़ की कर योग्य आय जोड़ने का आयकर विभाग का आदेश रद्द कर दिया है। अधिकरण ने कहा कि विभाग ने केवल सकल जीत (ग्रॉस विनिंग) को आधार बनाकर कर लगा दिया, जबकि उपलब्ध रिकॉर्ड से स्पष्ट था कि करदाता को पूरे वर्ष में ₹30.43 लाख का शुद्ध घाटा हुआ था। ऐसे में वास्तविक आय के अभाव में कर नहीं लगाया जा सकता।

यह मामला आकलन वर्ष 2022-23 से जुड़ा है। करदाता एमदारापु कुमारस्वामी ने अपनी आयकर विवरणी में वेतन और अन्य स्रोतों से प्राप्त आय घोषित की थी। जांच के दौरान आयकर विभाग को गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड से प्राप्त जानकारी के आधार पर पता चला कि करदाता ने ऑनलाइन रम्मी के माध्यम से ₹3,54,44,447 की सकल जीत हासिल की थी। विभाग का आरोप था कि इस राशि को आयकर रिटर्न में नहीं दिखाया गया, इसलिए आयकर अधिनियम की धारा 115बीबी के तहत इसे कर योग्य मानते हुए पूरी राशि जोड़ दी गई। साथ ही धारा 58(4) का हवाला देकर किसी भी प्रकार की कटौती देने से इनकार कर दिया गया।

करदाता ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि विभाग ने केवल सकल जीत को देखा, जबकि गेम खेलने के लिए उसने इससे अधिक राशि ‘बाय-इन’ के रूप में लगाई थी। गेमिंग कंपनी के रिकॉर्ड के अनुसार उसने पूरे वर्ष में ₹3.84 करोड़ से अधिक की राशि खेल में लगाई और अंततः ₹30.43 लाख का शुद्ध घाटा उठाया। इसलिए उसे वास्तविक रूप से कोई कर योग्य जीत प्राप्त नहीं हुई।

राष्ट्रीय फेसलेस अपील केंद्र के आयुक्त (अपील) ने आयकर अधिकारी के आदेश को बरकरार रखा। उनका कहना था कि संबंधित आकलन वर्ष में धारा 115बीबी के तहत खेलों से प्राप्त सकल जीत पर कर लगाया जाता था और 1 अप्रैल 2024 से लागू हुए संशोधित प्रावधान, जिसमें ऑनलाइन गेम्स की शुद्ध जीत पर कर लगाने की व्यवस्था की गई है, इस मामले पर लागू नहीं होंगे।

मामला आईटीएटी पहुंचने पर पीठ ने गेम्सक्राफ्ट द्वारा उपलब्ध कराए गए लेनदेन के रिकॉर्ड का विस्तार से परीक्षण किया। अधिकरण ने पाया कि कंपनी के रिकॉर्ड में स्पष्ट रूप से करदाता के भुगतान, निकासी और खेल में हुए लाभ-हानि का पूरा विवरण दर्ज था, जिससे यह साबित होता है कि उसे ₹30.43 लाख का शुद्ध नुकसान हुआ था। इसके बावजूद आकलन अधिकारी ने केवल सकल जीत को आधार बनाकर कर लगा दिया।

अधिकरण ने अपने आदेश में कहा, “धारा 115बीबी के तहत खेलों से होने वाली जीत को करदाता की वास्तविक शुद्ध जीत के संदर्भ में समझा जाना चाहिए।” पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि खेल में लगाई गई राशि सकल जीत से अधिक है और अंतिम परिणाम घाटे के रूप में सामने आता है, तो उसे कर योग्य आय नहीं माना जा सकता।

आईटीएटी ने यह भी महत्वपूर्ण माना कि गेमिंग कंपनी ने करदाता की कथित जीत पर आयकर अधिनियम की धारा 194बी के तहत स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) नहीं की थी। अधिकरण ने कहा कि यदि वास्तव में कर योग्य जीत हुई होती, तो सामान्य परिस्थितियों में टीडीएस काटा जाता। यह तथ्य भी इस बात की पुष्टि करता है कि करदाता को वास्तविक लाभ नहीं हुआ था।

इन परिस्थितियों में अधिकरण ने आयकर अधिकारी और आयुक्त (अपील) दोनों के आदेशों को रद्द करते हुए ₹3.54 करोड़ की पूरी जोड़ हटाने का निर्देश दिया।

हालांकि, अध्याय-6ए के तहत कटौतियों और धारा 24(बी) के अंतर्गत मकान ऋण ब्याज से संबंधित ₹5.71 लाख की अलग जोड़ के मामले में अधिकरण ने राहत देने के बजाय मामला पुनः आकलन अधिकारी के पास भेज दिया। पीठ ने कहा कि करदाता ने दावा किया है कि उसने धारा 139(8ए) के तहत अद्यतन विवरणी तैयार कर धारा 140बी के अनुसार कर जमा कर दिया था। इसलिए अधिकारी इन दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे और यदि कर पहले ही जमा किया जा चुका है, तो दोहरी कराधान से बचने के लिए यह जोड़ भी हटाई जाएगी।

यह निर्णय ऑनलाइन गेमिंग और रम्मी खेलने वाले करदाताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आईटीएटी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि आयकर विभाग केवल सकल लेनदेन के आंकड़ों के आधार पर कर नहीं लगा सकता। यदि रिकॉर्ड से वास्तविक लाभ के बजाय नुकसान साबित होता है, तो केवल बड़ी राशि का लेनदेन अपने आप कर योग्य आय नहीं बन जाता।