दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व मेजर जनरल आनंद कुमार कपूर को आय से अधिक संपत्ति मामले में किया बरी, कहा- निष्पक्ष सुनवाई से समझौता नहीं हो सकता

Delhi High Court

लगभग एक दशक पहले आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी ठहराए गए भारतीय सेना के पूर्व मेजर जनरल आनंद कुमार कपूर को दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की एकलपीठ ने वर्ष 2016 में विशेष सीबीआई अदालत द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि, सजा और लगभग 2.22 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्ती के आदेश को रद्द कर दिया।

हाईकोर्ट ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई प्रत्येक आरोपी का संवैधानिक अधिकार है और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के मामलों में कठोर कार्रवाई आवश्यक है, लेकिन किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले उसे अपना बचाव प्रस्तुत करने का पूरा और प्रभावी अवसर दिया जाना अनिवार्य है।

अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष को अपने साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए लगभग छह महीने का समय दिया गया, जबकि बचाव पक्ष को प्रभावी रूप से केवल तीन सुनवाई का अवसर मिला। आनंद कुमार कपूर ने बचाव में नौ गवाहों की सूची प्रस्तुत की थी, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने केवल चार गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद बचाव पक्ष के साक्ष्य बंद कर दिए।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अंतिम सुनवाई के दिन वकीलों की हड़ताल के कारण बचाव पक्ष ने सीमित समय के लिए स्थगन की मांग की थी, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने केवल सर्वोच्च न्यायालय द्वारा शीघ्र सुनवाई के निर्देश का हवाला देते हुए यह अनुरोध अस्वीकार कर दिया। अदालत ने माना कि प्रक्रिया संबंधी समय-सीमा निष्पक्ष सुनवाई के संवैधानिक अधिकार से ऊपर नहीं हो सकती।

मामले के तथ्यों की दोबारा समीक्षा करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आनंद कुमार कपूर के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति का आरोप संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा। अदालत ने पाया कि दिल्ली स्थित बेसमेंट संपत्ति के मूल्यांकन के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य नहीं था और यह साबित नहीं किया जा सका कि बिक्री विलेख में दर्ज राशि से अधिक भुगतान किया गया था।

गोवा स्थित संपत्ति के संबंध में भी अदालत ने कहा कि केवल पुत्र के नाम पर संपत्ति होने से उसे आनंद कुमार कपूर की संपत्ति नहीं माना जा सकता। जांच अधिकारी ने न तो धन के स्रोत की जांच की और न ही पुत्र अथवा विक्रेता से पूछताछ की। इसके अलावा कुछ निवेश, नकद जमा और अन्य संपत्तियां भी गलत तरीके से कपूर की संपत्ति में जोड़ दी गई थीं, जबकि उपलब्ध साक्ष्यों से वे उनकी मां और अन्य परिवारजनों से संबंधित थीं।

हाईकोर्ट ने अभियोजन स्वीकृति को भी कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण बताते हुए कहा कि सक्षम प्राधिकारी ने बिना पर्याप्त विचार किए अभियोजन की अनुमति दी थी, जो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की वैधानिक आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं थी। अदालत ने इसे भी दोषसिद्धि रद्द करने का स्वतंत्र आधार माना।

इन सभी कारणों के आधार पर दिल्ली हाईकोर्ट ने विशेष सीबीआई अदालत का वर्ष 2016 का फैसला, एक वर्ष के कठोर कारावास, 50 हजार रुपये के जुर्माने तथा लगभग 2.22 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त करने के आदेश को निरस्त करते हुए आनंद कुमार कपूर को सभी आरोपों से बरी कर दिया।