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अदालतों से आगे बढ़कर संवाद की ओर: 90 दिवसीय मध्यस्थता अभियान ने न्याय को दिया मानवीय चेहरा : दुर्ग के 90 दिवसीय मध्यस्थता अभियान ने दिखाया कि हर विवाद का समाधान फैसले से नहीं, बल्कि संवाद, सहमति और विश्वास से भी संभव है। यह पहल केवल मुकदमों के निपटारे तक सीमित नहीं रही, बल्कि न्याय को सामाजिक सद्भाव से जोड़ने का प्रयास बनी।
- S. A. Dubey
- 18.06.2026
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जिला न्यायपालिका: लोकतंत्र की धड़कन और न्याय व्यवस्था की वास्तविक आधारशिला – जब आम नागरिक न्याय की उम्मीद लेकर अदालत की चौखट पर पहुंचता है, तब जिला न्यायपालिका ही संविधान के वादों को वास्तविकता में बदलने का कार्य करती है।
- Editor-in-Chief
- 01.01.2024
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मार्टिन लूथर किंग जूनियर का यह अमर कथन (“Injustice anywhere is a threat to justice everywhere.”) केवल एक नैतिक संदेश नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की आत्मा का परिचायक है। किसी भी समाज में अन्याय केवल एक व्यक्ति या एक समुदाय को प्रभावित नहीं करता, बल्कि वह पूरे लोकतांत्रिक ढांचे की विश्वसनीयता को चुनौती देता है। […]
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 : लोकतंत्र में नागरिक की सबसे बड़ी शक्ति
- S. A. Dubey
- 22.06.2026
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भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act) एक ऐसी क्रांतिकारी व्यवस्था है जिसने शासन और नागरिक के बीच संबंधों को नई दिशा प्रदान की है। यह कानून नागरिकों को सरकारी कार्यालयों, विभागों, निगमों, पंचायतों, नगर निकायों, सार्वजनिक उपक्रमों तथा सरकार द्वारा वित्तपोषित संस्थाओं से सूचना प्राप्त करने का वैधानिक अधिकार […]
सेमीकंडक्टर निर्माण की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़: औद्योगिक आत्मनिर्भरता का नया अध्याय
- S. A. Dubey
- 10.06.2026
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छत्तीसगढ़ लंबे समय से अपनी खनिज संपदा, इस्पात उद्योग और ऊर्जा उत्पादन के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन अब राज्य एक नई औद्योगिक क्रांति की दहलीज पर खड़ा दिखाई देता है। नवा रायपुर में विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) के अंतर्गत देश के पहले सेमीकंडक्टर निर्माण संयंत्र की स्थापना की दिशा में हुई प्रगति केवल […]
