सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 2023 की मणिपुर जातीय हिंसा से जुड़े आपराधिक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतों के गठन का सुझाव दिया। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने कहा कि जांच पूरी होने और आरोपपत्र दाखिल होने के बाद विशेष अदालतों में मामलों की रोजाना सुनवाई कराई जा सकती है।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि राज्य की एसआईटी 3,020 मामलों की जांच कर रही है, जिनमें अब तक केवल 301 मामलों में आरोपपत्र दाखिल हुए हैं। वहीं, सीबीआई को सौंपे गए 31 मामलों में 21 में आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और एसआईटी को लंबित जांच जल्द पूरी करने, मणिपुर सरकार को जांच एजेंसियों को हर संभव सहयोग देने तथा पीड़ितों को एक सप्ताह के भीतर आरोपपत्र की प्रतियां उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। अदालत ने मणिपुर हाईकोर्ट से हिंसा के दौरान लापता 30 लोगों के मामलों की भी समीक्षा करने को कहा।
