सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मान्यता प्राप्त मदरसों के शिक्षकों और गैर-शिक्षकीय कर्मचारियों की नियमितीकरण, सेवा जारी रखने और अनुदान (ग्रांट-इन-एड) की मांग वाली सभी याचिकाएं सोमवार को खारिज कर दीं। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि किसी भी याचिकाकर्ता ने राहत पाने का वैध कानूनी आधार प्रस्तुत नहीं किया है।
मामले में 40 से अधिक याचिकाएं दायर की गई थीं, जिनमें लगभग 361 शिक्षकों और कर्मचारियों ने अपनी नियुक्तियों को वैध बताते हुए राहत की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने पहले 13 मामलों की विस्तार से जांच कराई थी और पाया कि इनमें से किसी भी नियुक्ति में न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। इसके बाद अदालत ने शेष सभी याचिकाओं को भी खारिज कर दिया।
यह विवाद पश्चिम बंगाल मदरसा सेवा आयोग अधिनियम, 2008 के तहत नियुक्तियों से जुड़ा था। वर्ष 2023 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति ने जांच के बाद इन नियुक्तियों को नियमों के अनुरूप नहीं माना था। इसी समिति की रिपोर्ट को चुनौती देते हुए याचिकाएं दायर की गई थीं।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में समिति की रिपोर्ट को सही ठहराते हुए स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता नियमितीकरण, सेवा जारी रखने या सरकारी अनुदान के किसी भी लाभ के हकदार नहीं हैं। इसके साथ ही सभी लंबित याचिकाओं का निस्तारण कर दिया गया।
