नई दिल्ली। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय अधिकरण (NCLAT) ने संपत्ति का खाली कब्जा मिलने में देरी के कारण स्वीकृत रिजॉल्यूशन प्लान की समय-सीमा से अतिरिक्त अवधि बाहर रखने संबंधी अपने पूर्व आदेश को वापस लेने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति योगेश खन्ना की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने बी.डी. अग्रवाल की रिकॉल याचिका खारिज कर दी।
मामले में सफल रिजॉल्यूशन आवेदक ने ₹4.20 करोड़ से अधिक की अग्रिम राशि निर्धारित समय में जमा कर दी थी, लेकिन जयपुर स्थित संपत्ति पर Countertops कंपनी का कब्जा होने के कारण उसे संपत्ति नहीं मिल सकी। NCLAT ने कहा कि जब देरी आवेदक की गलती के कारण नहीं हुई, तो उसे इसके लिए दंडित नहीं किया जा सकता।
पीठ ने स्पष्ट किया कि रिजॉल्यूशन प्लान के भुगतान की समय-सीमा में उचित परिस्थितियों में अवधि बढ़ाना या अतिरिक्त समय को बाहर रखना अपने आप में योजना में संशोधन नहीं है। अधिकरण ने 17 जुलाई 2026 के अपने पूर्व आदेश को बरकरार रखते हुए रिकॉल याचिका खारिज कर दी।
