छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (RERA) ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि किसी आवासीय परियोजना में निवासियों की समिति या एसोसिएशन को परियोजना का हस्तांतरण होने तक परियोजना के रखरखाव (मेंटेनेंस) की जिम्मेदारी प्रमोटर की होती है और इस अवधि में आवंटी (फ्लैट खरीदार) निर्धारित मेंटेनेंस शुल्क का भुगतान करने के लिए बाध्य हैं। प्राधिकरण ने साम्राज्य रेसीडेंसी परियोजना से जुड़े एक विवाद में फ्लैट मालिक को बकाया मेंटेनेंस शुल्क तथा उस पर ब्याज का भुगतान करने का निर्देश दिया है।
यह मामला मेसर्स आधारशिला डेवलपर्स द्वारा दायर शिकायत से संबंधित था, जिसमें परियोजना “साम्राज्य रेसीडेंसी”, खमतराई, रायपुर के एक आवंटी अविनाश कुमार सिन्हा के खिलाफ बकाया मेंटेनेंस शुल्क की वसूली की मांग की गई थी। डेवलपर का कहना था कि संबंधित आवंटी ने परियोजना में स्थित अपने फ्लैट का कब्जा प्राप्त कर लिया था और परियोजना की सामान्य सुविधाओं तथा रखरखाव सेवाओं का लाभ भी ले रहा था, लेकिन लंबे समय से मेंटेनेंस शुल्क का भुगतान नहीं कर रहा था।
शिकायत में बताया गया कि परियोजना का पंजीकरण रेरा के तहत किया गया था तथा सक्षम प्राधिकारी द्वारा 8 जनवरी 2024 को पूर्णता प्रमाण पत्र (Completion Certificate) भी जारी किया जा चुका था। इसके बावजूद परियोजना का औपचारिक हस्तांतरण अभी तक निवासियों की सहकारी समिति को नहीं हुआ था। डेवलपर ने दावा किया कि कई बार व्यक्तिगत बैठकों, पत्राचार और टेलीफोन के माध्यम से शुल्क जमा करने का अनुरोध किया गया, लेकिन भुगतान नहीं किया गया।
प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत रिकॉर्ड के अनुसार आवंटी को कई अवसर दिए गए, लेकिन वह सुनवाई में उपस्थित नहीं हुआ। 2 अप्रैल, 22 अप्रैल, 11 मई और 3 जून 2026 को निर्धारित सुनवाई के दौरान भी उसकी ओर से कोई उपस्थिति दर्ज नहीं कराई गई। इसके बाद प्राधिकरण ने एकपक्षीय कार्यवाही आगे बढ़ाई।
मामले की सुनवाई के दौरान रेरा ने रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 11(4)(घ), धारा 19(6) और धारा 19(7) के प्रावधानों पर विस्तार से विचार किया। प्राधिकरण ने कहा कि कानून के अनुसार जब तक आवंटियों का संघ या समिति परियोजना का रखरखाव अपने हाथ में नहीं ले लेती, तब तक प्रमोटर आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने और उनका रखरखाव करने के लिए जिम्मेदार रहता है। साथ ही, आवंटियों पर इन सेवाओं के लिए निर्धारित शुल्क का भुगतान करने का वैधानिक दायित्व भी है।
अपने आदेश में प्राधिकरण ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि, “संप्रवर्तक आवंटितियों के संघ द्वारा परियोजना के अनुरक्षण का कार्यभार ग्रहण करने तक युक्तियुक्त प्रभारों पर अनिवार्य सेवाएं उपलब्ध कराने और उन्हें बनाए रखने के लिए उत्तरदायी होगा।” प्राधिकरण ने यह भी माना कि यदि कोई आवंटी निर्धारित अनुरक्षण शुल्क का भुगतान नहीं करता है तो वह रेरा अधिनियम के तहत अपने वैधानिक दायित्व का उल्लंघन करता है।
सुनवाई के दौरान एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा भी सामने आया। कुछ मामलों में डेवलपर द्वारा कुछ निवासियों को वर्ष 2024-25 के लिए मेंटेनेंस शुल्क में छूट दी गई थी। प्राधिकरण ने समानता के सिद्धांत को लागू करते हुए कहा कि यदि ऐसी छूट दी गई है तो उसका लाभ सभी पात्र आवंटियों को समान रूप से मिलना चाहिए। इसी आधार पर संबंधित आवंटी को भी ₹9,636 की छूट देने का निर्देश दिया गया।
प्राधिकरण ने रिकॉर्ड और व्यय विवरण का परीक्षण करने के बाद डेवलपर द्वारा निर्धारित अनुरक्षण शुल्क को उचित माना। आदेश के अनुसार प्रति वर्गफुट प्रति माह ₹1.993 की दर से शुल्क स्वीकार किया गया। कुल देय राशि से ₹9,636 की छूट घटाने के बाद आवंटी पर ₹59,617 का मेंटेनेंस बकाया निर्धारित किया गया।
अंततः रेरा ने आवंटी को आदेश दिया कि वह 45 दिनों के भीतर ₹59,617 का बकाया मेंटेनेंस शुल्क जीएसटी सहित अदा करे। इसके अतिरिक्त रेरा अधिनियम की धारा 18 तथा नियम 17 के तहत भारतीय स्टेट बैंक की मार्जिनल लेंडिंग दर के आधार पर 10.80 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की गणना करते हुए ₹5,634 ब्याज राशि का भी भुगतान करना होगा।
यह आदेश रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे स्पष्ट संदेश गया है कि फ्लैट खरीदार केवल संपत्ति के स्वामी बनने से ही अपने दायित्वों से मुक्त नहीं हो जाते। यदि वे परियोजना की सामान्य सुविधाओं और सेवाओं का लाभ लेते हैं तो उन्हें निर्धारित मेंटेनेंस शुल्क का भुगतान भी करना होगा। वहीं प्रमोटरों को भी सभी आवंटियों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करना होगा और किसी प्रकार की छूट या राहत देने पर समानता के सिद्धांत का पालन करना होगा।
