कर धोखाधड़ी मामले में प्राथमिकी निरस्त करने से उच्च न्यायालय का इनकार

High Court of Chhattisgarh - Bilaspur

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने कथित कर धोखाधड़ी और फर्जी बिलों के माध्यम से शासकीय राजस्व को नुकसान पहुंचाने के मामले में दर्ज प्राथमिकी तथा आपराधिक कार्यवाही को निरस्त करने से इनकार कर दिया है। न्यायालय ने कहा कि उपलब्ध अभिलेखों से प्रथम दृष्टया अपराध का मामला बनता है, इसलिए प्रकरण का परीक्षण विचारण न्यायालय में ही होगा।

मामले में आरोप है कि एक व्यावसायिक प्रतिष्ठान द्वारा कर विवरणियों में दर्शाई गई बिक्री और विभागीय अभिलेखों में दर्ज लेनदेन के बीच बड़ा अंतर पाया गया। जांच में यह भी आरोप लगाया गया कि फर्जी बिक्री बिलों के माध्यम से अन्य व्यापारियों को अनुचित कर लाभ दिलाया गया, जिससे राज्य को लगभग 17.81 लाख रुपये की राजस्व हानि हुई।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा एवं न्यायमूर्ति रवीन्द्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि केवल इस आधार पर कि विवाद कर कानून से संबंधित है, आपराधिक अपराधों की जांच और अभियोजन को रोका नहीं जा सकता। यदि आरोपों से छल, कपट और कूटरचना जैसे अपराधों का प्रथम दृष्टया संकेत मिलता है, तो मामले का परीक्षण साक्ष्यों के आधार पर विचारण न्यायालय द्वारा किया जाना आवश्यक है।

न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि उसके आदेश में की गई टिप्पणियां केवल वर्तमान याचिका के निस्तारण तक सीमित हैं और विचारण न्यायालय मामले का निर्णय स्वतंत्र रूप से उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर करेगा।