आईटीएटी से मुंबई पोर्ट अथॉरिटी को बड़ी राहत, ₹80 करोड़ के लीव एनकैशमेंट फंड योगदान पर कर कटौती मंजूर

Judgement and Order

मुंबई आयकर अपीलीय अधिकरण (ITAT) ने मुंबई पोर्ट अथॉरिटी को बड़ी राहत देते हुए कर्मचारियों के लीव एनकैशमेंट दायित्वों के लिए SBI लाइफ इंश्योरेंस को दिए गए ₹80 करोड़ के योगदान को आयकर कटौती योग्य व्यय माना है। अधिकरण ने कहा कि यह केवल भविष्य की देनदारी के लिए बनाई गई प्रावधान राशि नहीं, बल्कि वास्तव में किया गया भुगतान है, इसलिए इसे आयकर अधिनियम के तहत स्वीकार किया जाना चाहिए।

विभाग का तर्क था कि आयकर अधिनियम की धारा 43B(f) के तहत कटौती केवल कर्मचारियों को वास्तविक भुगतान होने पर ही मिल सकती है। हालांकि, अधिकरण ने पाया कि मुंबई पोर्ट अथॉरिटी ने राशि सीधे SBI लाइफ इंश्योरेंस को एक विशेष योजना के तहत जमा की थी और भुगतान के बाद उस राशि पर उसका कोई नियंत्रण नहीं रहा। इसलिए इसे वास्तविक व्यावसायिक खर्च माना जाएगा।

अधिकरण ने केरल उच्च न्यायालय के CIT बनाम Hindustan Latex Ltd. फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बीमा योजना के माध्यम से लीव एनकैशमेंट दायित्व को कवर करने के लिए किया गया वास्तविक भुगतान केवल प्रावधान नहीं माना जा सकता। न्यायाधिकरण ने इस आधार पर ₹80 करोड़ की की गई जोड़ को हटाने का निर्देश दिया।

इसी आदेश में ITAT ने मुंबई पोर्ट अथॉरिटी की अपीलों को आंशिक रूप से स्वीकार किया तथा राजस्व विभाग की दोनों अपीलों को खारिज कर दिया। यह फैसला सार्वजनिक उपक्रमों और बड़े नियोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो कर्मचारी लाभ योजनाओं के लिए बीमा आधारित फंडिंग व्यवस्था अपनाते हैं।