रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने नगरपालिकाओं और नगर निगमों की अचल संपत्तियों के हस्तांतरण, पट्टा, किराया एवं नामांतरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए “छत्तीसगढ़ नगरपालिका (अचल संपत्ति व्ययन) नियम, 2026” लागू कर दिए हैं। इन नियमों की अधिसूचना 10 जून 2026 को छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित की गई है।
नए नियमों के अनुसार स्थानीय नगरीय निकायों की अचल संपत्तियों का विक्रय, पट्टा अथवा अन्य प्रकार का हस्तांतरण सामान्यतः ई-निविदा प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए निविदा सूचना कम से कम 15 दिन पहले प्रकाशित करना अनिवार्य होगा। साथ ही संबंधित नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत और कलेक्टर कार्यालयों के सूचना पट्टों पर भी इसकी जानकारी प्रदर्शित की जाएगी।
नियमों में यह भी प्रावधान किया गया है कि विशेष परिस्थितियों में, सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति से बंद लिफाफा प्रक्रिया के माध्यम से भी निविदाएं आमंत्रित की जा सकती हैं। वहीं सार्वजनिक हित अथवा सामाजिक उद्देश्यों के लिए सरकारी एवं पंजीकृत सार्वजनिक संस्थाओं को संपत्ति हस्तांतरण के मामलों में राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी।
सरकार ने नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के लिए संपत्ति हस्तांतरण की स्वीकृति संबंधी वित्तीय अधिकार भी निर्धारित किए हैं। 50 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियों के हस्तांतरण के लिए राज्य शासन की मंजूरी अनिवार्य होगी।
नियमों में किराये पर दी जाने वाली निर्मित संपत्तियों के लिए वार्षिक किराया निर्धारण, किराये में वृद्धि, सुरक्षा निधि तथा नामांतरण शुल्क संबंधी विस्तृत प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। इसके अलावा संपत्ति के आरक्षित मूल्य निर्धारण के लिए कलेक्टर गाइडलाइन और विकास कार्यों पर हुए वास्तविक व्यय को आधार बनाया जाएगा।
राज्य सरकार का मानना है कि नए नियमों के लागू होने से स्थानीय निकायों की संपत्तियों के उपयोग और प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी, राजस्व संग्रह में सुधार होगा तथा संपत्ति आवंटन की प्रक्रिया अधिक जवाबदेह बनेगी।
