याचिकाकर्ता की मौत के बाद बेटा स्वतः नहीं जारी रख सकता रिट याचिका: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

High Court of Chhattisgarh - Bilaspur

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा है कि किसी याचिकाकर्ता की मृत्यु के बाद उसका कानूनी वारिस केवल उत्तराधिकारी होने के आधार पर स्वतः रिट याचिका को आगे नहीं बढ़ा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि इसके लिए कानून के अनुसार विधिवत प्रतिस्थापन (substitution) और अधिकार की मान्यता आवश्यक है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने कुलवंत चावला (मृतक) के विधिक प्रतिनिधि गुरुवंश सिंह चावला बनाम राज्य शासन एवं अन्य मामले में दायर रिट अपील खारिज कर दी। मामला जिला सहकारी संघ मर्यादित, महासमुंद में लिक्विडेटर की नियुक्ति और चुनाव संबंधी विवाद से जुड़ा था।

अदालत ने कहा कि सहकारी संस्था के चुनाव और उसके प्रबंधन से जुड़े विवाद मूल रूप से व्यक्तिगत प्रकृति के होते हैं। इसलिए मूल याचिकाकर्ता की मृत्यु के बाद विवाद उसी रूप में जीवित नहीं रहता। हाईकोर्ट ने यह भी माना कि छत्तीसगढ़ सहकारी समितियां अधिनियम, 1960 की धारा 26 केवल मृत सदस्य के शेयर या हितों के हस्तांतरण से संबंधित है, यह किसी न्यायिक कार्यवाही को स्वतः जारी रखने का अधिकार नहीं देती।

खंडपीठ ने सिंगल बेंच के उस आदेश को भी सही ठहराया, जिसमें मृत व्यक्ति के नाम से दायर रिकॉल आवेदन को अमान्य माना गया था। अदालत ने कहा कि यदि कानूनी वारिस के पास कोई स्वतंत्र अधिकार है तो वह उसे कानून के अनुसार उचित मंच पर लागू कर सकता है, लेकिन इससे पहले से समाप्त हो चुकी रिट याचिका स्वतः पुनर्जीवित नहीं हो जाती।

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने सिंगल जज के दोनों आदेशों को बरकरार रखते हुए रिट अपील को निराधार मानकर खारिज कर दिया।