हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी का बड़ा फैसला: बिना एग्रीमेंट बुकिंग राशि लेने वाले बिल्डर को 10.80% ब्याज सहित पैसा लौटाने का आदेश

RERA - Real Estate Regulatory Authority

हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (HP RERA) ने घर खरीदारों के हितों की रक्षा करते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। प्राधिकरण ने एक रियल एस्टेट कंपनी को फ्लैट बुकिंग के लिए प्राप्त ₹1.01 लाख की राशि ब्याज सहित वापस करने का निर्देश दिया है। अथॉरिटी ने स्पष्ट किया कि यदि बिल्डर ने खरीदार से अग्रिम राशि लेने के बाद न तो बिक्री समझौता (Agreement for Sale) किया है और न ही आवंटन पत्र (Allotment Letter) जारी किया है, तो वह राशि को अपने पास नहीं रख सकता।

मामला शिमला निवासी विमल सना द्वारा दायर शिकायत से जुड़ा था। शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने “मशोबरा हिल्स” नामक आवासीय परियोजना में एक स्टूडियो अपार्टमेंट खरीदने में रुचि दिखाई थी। बिल्डर की ओर से परियोजना की सुविधाओं, आवश्यक स्वीकृतियों और दस्तावेजी प्रक्रियाओं के बारे में आश्वासन दिए गए थे। इन दावों पर भरोसा करते हुए शिकायतकर्ता ने 6 नवंबर 2023 को फ्लैट बुकिंग के लिए ₹1,01,000 जमा कर दिए।

हालांकि, बाद में शिकायतकर्ता ने लगभग एक महीने के भीतर अपनी बुकिंग रद्द करने का निर्णय लिया और जमा राशि वापस मांगी। शिकायत के अनुसार, कई बार अनुरोध करने के बावजूद बिल्डर ने राशि वापस नहीं की, जिसके बाद मामला HP RERA के समक्ष पहुंचा।

बिल्डर कंपनी राजदीप एंड कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड ने शिकायत का विरोध करते हुए कहा कि खरीदार ने व्यक्तिगत वित्तीय कारणों से स्वयं बुकिंग रद्द की थी और परियोजना या प्रमोटर की ओर से कोई चूक नहीं हुई थी। कंपनी का यह भी तर्क था कि पक्षों के बीच कोई बिक्री समझौता नहीं हुआ था, इसलिए रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 18 और 19 के तहत रिफंड का दावा नहीं बनता।

दूसरी ओर, शिकायतकर्ता ने कहा कि बिल्डर ने RERA अधिनियम की धारा 13 का उल्लंघन करते हुए अग्रिम राशि स्वीकार की, जबकि न तो कोई एग्रीमेंट फॉर सेल किया गया और न ही कोई आवंटन पत्र जारी किया गया। शिकायतकर्ता का तर्क था कि ऐसी स्थिति में बिल्डर को राशि रोककर रखने का कोई अधिकार नहीं है।

मामले की सुनवाई के दौरान HP RERA ने पाया कि बिल्डर ने स्वयं स्वीकार किया है कि उसने शिकायतकर्ता से ₹1.01 लाख प्राप्त किए थे और राशि अपने पास रखी हुई थी। प्राधिकरण ने यह भी पाया कि दोनों पक्षों के बीच कोई बिक्री समझौता निष्पादित नहीं किया गया था। अथॉरिटी ने बिल्डर के उस तर्क को अस्वीकार कर दिया कि केवल 10 प्रतिशत से अधिक राशि प्राप्त होने पर ही समझौता करना आवश्यक होता है।

अपने आदेश में HP RERA ने कहा कि RERA अधिनियम की धारा 13 का उद्देश्य संभावित खरीदारों से मनमाने ढंग से धन संग्रह को रोकना है। प्राधिकरण ने कहा कि यदि कोई प्रमोटर बुकिंग राशि स्वीकार करता है और आवंटन प्रक्रिया आगे बढ़ाता है, तो वह आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करने और अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकता।

अथॉरिटी ने यह भी नोट किया कि बिल्डर कोई ऐसा दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका जिसमें बुकिंग रद्द होने की स्थिति में राशि जब्त करने, कटौती करने या उसे गैर-वापसी योग्य घोषित करने का प्रावधान हो। ऐसे किसी अनुबंधीय प्रावधान के अभाव में बिल्डर द्वारा राशि रोकना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।

HP RERA ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण निर्णयों का भी उल्लेख किया, जिनमें Pioneer Urban Land and Infrastructure Ltd. v. Govindan Raghavan, Imperia Structures Ltd. v. Anil Patni तथा Experion Developers Pvt. Ltd. v. Sushma Ashok Shiroor शामिल हैं। इन फैसलों में सर्वोच्च न्यायालय ने रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, निष्पक्षता और उपभोक्ता संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया था।

प्राधिकरण ने आगे पाया कि बिल्डर ने हिमाचल प्रदेश रेरा (आवंटन पत्र) विनियम, 2023 के तहत आवश्यक आवंटन पत्र भी जारी नहीं किया था। इसलिए उसे RERA अधिनियम की धारा 11(3) के उल्लंघन का दोषी माना गया।

रिफंड के प्रश्न पर HP RERA ने कहा कि भले ही खरीदार ने स्वयं वित्तीय कारणों से लेन-देन से पीछे हटने का फैसला किया हो, लेकिन जब कोई वैध समझौता मौजूद नहीं है और राशि की जब्ती का कोई कानूनी आधार नहीं है, तब बिल्डर जमा धनराशि को अपने पास नहीं रख सकता। प्राधिकरण ने माना कि शिकायतकर्ता लगातार रिफंड की मांग करती रही, जबकि बिल्डर राशि रोकने के लिए कोई वैध अनुबंधीय या कानूनी आधार नहीं दिखा सका।

ब्याज के संबंध में HP RERA ने कहा कि शिकायतकर्ता को उसके धन के उपयोग से वंचित रखा गया है, इसलिए उसे उचित ब्याज मिलना चाहिए। हालांकि, चूंकि मामला विलंबित कब्जे का नहीं था और खरीदार ने स्वयं बुकिंग रद्द की थी, इसलिए दंडात्मक ब्याज के बजाय उचित ब्याज देना न्यायोचित होगा।

अंततः HP RERA ने शिकायत स्वीकार करते हुए राजदीप एंड कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता को ₹1,01,000 की पूरी राशि वापस करे। साथ ही हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) नियम, 2017 के नियम 15 के अनुसार 10.80 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी अदा करे। यह भुगतान आदेश जारी होने की तारीख से 60 दिनों के भीतर करना होगा।

यह फैसला रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे स्पष्ट संदेश जाता है कि बिना एग्रीमेंट फॉर सेल और आवश्यक दस्तावेजों के खरीदारों से धन लेने के बाद बिल्डर मनमाने ढंग से राशि नहीं रोक सकते। यह आदेश RERA के उपभोक्ता संरक्षण उद्देश्य को और मजबूत करता है तथा घर खरीदारों के अधिकारों को प्रभावी सुरक्षा प्रदान करता है।