केरल के त्रिशूर स्थित उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में PNB Housing Finance Ltd. को होम लोन बंद करने की प्रक्रिया में देरी के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उपभोक्ता को अतिरिक्त वसूला गया ब्याज लौटाने और मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग ने माना कि कंपनी ने समय पर फोरक्लोजर स्टेटमेंट जारी नहीं किया और बाद में उसी देरी की अवधि का ब्याज भी वसूल लिया, जो सेवा में कमी (Deficiency in Service) है।
मामले में शिकायतकर्ता सिजू राज ए ने बताया कि उन्होंने अपने होम लोन खाते को समय से पहले बंद करने के लिए 5 जनवरी 2023 को फोरक्लोजर स्टेटमेंट जारी करने का अनुरोध किया था और इसके लिए निर्धारित शुल्क ₹885 भी जमा किया था। उनका आरोप था कि नियमों के अनुसार 21 कार्यदिवस के भीतर फोरक्लोजर स्टेटमेंट जारी किया जाना चाहिए था, लेकिन PNB Housing Finance ने इसे 20 फरवरी 2023 को जारी किया। इस देरी के कारण उन्हें अतिरिक्त 18 दिनों का ब्याज देना पड़ा, जिसकी राशि ₹18,342 थी।
वहीं, PNB Housing Finance ने अपने बचाव में कहा कि फोरक्लोजर अनुरोध मिलने के बाद कंपनी ने शिकायतकर्ता को कम ब्याज दर पर लोन जारी रखने का प्रस्ताव दिया था। कंपनी के अनुसार, इस प्रस्ताव पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही थी, जिसके कारण फोरक्लोजर प्रक्रिया प्रभावित हुई। हालांकि आयोग ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।
आयोग ने स्पष्ट कहा कि किसी ग्राहक द्वारा विधिवत शुल्क जमा कर फोरक्लोजर स्टेटमेंट मांगे जाने के बाद केवल बातचीत या प्रस्ताव के आधार पर उस अनुरोध को रोका नहीं जा सकता। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि “मात्र बातचीत या प्रस्ताव किसी वैध और लंबित फोरक्लोजर अनुरोध को निष्प्रभावी नहीं कर सकता।” आयोग ने यह भी कहा कि कंपनी अपने व्यावसायिक हितों के लिए की गई बातचीत का उपयोग उपभोक्ता के अधिकारों को प्रभावित करने के लिए नहीं कर सकती।
आयोग ने पाया कि फोरक्लोजर स्टेटमेंट निर्धारित समयसीमा के भीतर जारी नहीं किया गया और देरी पूरी तरह कंपनी की वजह से हुई। इसलिए देरी की अवधि का ब्याज वसूलना मनमाना और अनुचित था। आयोग ने यह भी दोहराया कि कोई भी पक्ष अपनी ही गलती का लाभ नहीं उठा सकता।
इन परिस्थितियों को देखते हुए आयोग ने PNB Housing Finance को शिकायतकर्ता को ₹18,342 अतिरिक्त वसूले गए ब्याज की वापसी, ₹25,000 मानसिक पीड़ा, असुविधा और वित्तीय कठिनाई के लिए मुआवजा तथा ₹10,000 वाद व्यय के रूप में देने का निर्देश दिया। आयोग ने यह भी आदेश दिया कि इन सभी राशियों पर शिकायत दायर किए जाने की तारीख से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा। कंपनी को 45 दिनों के भीतर आदेश का पालन करने को कहा गया है।
यह फैसला उन लाखों बैंक और हाउसिंग लोन ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो समयपूर्व ऋण समापन (Loan Foreclosure) के दौरान अनावश्यक देरी और अतिरिक्त शुल्क का सामना करते हैं। आयोग का यह निर्णय स्पष्ट संदेश देता है कि वित्तीय संस्थानों को उपभोक्ताओं के वैध अनुरोधों पर निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई करनी होगी और अपनी देरी का आर्थिक बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल सकते।
