महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और अधिकारों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने केंद्र सरकार को देशभर की जेलों की निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक राष्ट्रीय कारागार आयोग (National Commission for Prisons) गठित करने की सिफारिश की है। आयोग ने यह सुझाव अपनी लॉ रिव्यू 2025-26 रिपोर्ट में दिया है, जो जेलों में बंद महिलाओं से संबंधित कानूनों और व्यवस्थाओं की समीक्षा पर आधारित है।
एनसीडब्ल्यू ने अपनी अनुशंसात्मक रिपोर्ट गृह मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को भेजी है। रिपोर्ट में महिलाओं के लिए अधिक संवेदनशील, मानवीय और अधिकार-आधारित सुधारात्मक व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया है।
रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण सुधारों का प्रस्ताव रखा गया है। इनमें जेलों में स्थायी रूप से चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्ति, महिला बंदियों के लिए विशेष स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था, मानसिक आघात से जूझ रही महिलाओं के लिए ट्रॉमा-इन्फॉर्म्ड केयर सिस्टम विकसित करना और गर्भवती महिला कैदियों के प्रसव को बाहरी अस्पतालों में अनिवार्य रूप से कराने की व्यवस्था शामिल है।
आयोग का मानना है कि जेल सुधारों में महिला बंदियों की विशेष आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, गरिमापूर्ण जीवन और उनके संवैधानिक एवं मानवाधिकारों की प्रभावी सुरक्षा मिल सके। यदि इन सिफारिशों पर अमल किया जाता है, तो देश की जेल व्यवस्था में महिलाओं के लिए व्यापक और संरचनात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
