बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में एक्स-पार्टी GST असेसमेंट के खिलाफ करदाता को राहत देते हुए निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने के बावजूद वैधानिक अपील दाखिल करने की अनुमति प्रदान की है। न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकलपीठ ने कोरबा स्टील कास्टिंग्स (Korba Steel Castings) को कुल निर्धारित टैक्स देनदारी का 50 प्रतिशत यानी ₹4,08,885.84 जमा करने की शर्त पर अपील प्रस्तुत करने का अवसर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आदेश की प्रति प्राप्त होने के एक महीने के भीतर अपील दाखिल किए जाने पर अपीलीय प्राधिकारी केवल देरी के आधार पर उसे खारिज नहीं करेगा और मामले का गुण-दोष के आधार पर निर्णय करेगा।
मामला कोरबा स्टील कास्टिंग्स प्रोपराइटरशिप फर्म द्वारा दायर रिट याचिका WPT No. 58 of 2026 से संबंधित है। याचिकाकर्ता ने राज्य कर अधिकारी, कोरबा सर्किल-II द्वारा 13 दिसंबर 2023 को पारित एक्स-पार्टी असेसमेंट आदेश को चुनौती दी थी। उक्त आदेश के माध्यम से फर्म पर ब्याज एवं पेनल्टी सहित कुल ₹8,17,771.69 की टैक्स देनदारी निर्धारित की गई थी।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विक्रम शर्मा ने दलील दी कि विभाग ने बिना उचित कारण बताओ नोटिस जारी किए और सुनवाई का प्रभावी अवसर दिए बिना असेसमेंट आदेश पारित कर दिया। इससे GST अधिनियम, 2017 की धारा 61, 73 एवं 169 के प्रावधानों तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ है।
याचिकाकर्ता के अनुसार, उसे असेसमेंट आदेश की जानकारी तब मिली, जब उसके सप्लायर M/s Maruti Aluminum Foil & Sheets को विभाग की ओर से वसूली संबंधी नोटिस जारी किया गया। 24 मार्च 2026 के इस नोटिस के माध्यम से GST अधिनियम की धारा 79(1)(c) के तहत सप्लायर से याचिकाकर्ता को देय राशि में से ₹8,17,772 जमा करने के लिए कहा गया था।
दूसरी ओर, राज्य शासन की ओर से उपस्थित उप शासकीय अधिवक्ता अनूराधा जैन ने तर्क दिया कि विभाग ने करदाता को पर्याप्त अवसर प्रदान किए थे, लेकिन उसने अपना जवाब प्रस्तुत नहीं किया। राज्य की ओर से यह भी कहा गया कि GST अधिनियम के तहत अपील दाखिल करने की निर्धारित समय-सीमा समाप्त हो चुकी है, इसलिए अब अपील स्वीकार नहीं की जा सकती।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कुल टैक्स देनदारी का 50 प्रतिशत जमा करने की सहमति देते हुए असेसमेंट आदेश के विरुद्ध वैधानिक अपील दाखिल करने का अवसर मांगा। हाईकोर्ट ने इस प्रस्ताव पर विचार करते हुए ₹4,08,885.84 जमा करने की शर्त पर अपील दाखिल करने की अनुमति प्रदान की।
न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट की असाधारण अधिकारिता का प्रयोग करते हुए कहा कि पक्षकारों के बीच पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए इस मामले में हस्तक्षेप किया जाना उचित है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से एक महीने के भीतर अपील प्रस्तुत की जाए। ऐसी स्थिति में अपीलीय प्राधिकारी देरी का आधार लेकर अपील सुनने से इनकार नहीं करेगा, क्योंकि हाईकोर्ट ने निर्धारित शर्त के अधीन विलंब माफ कर दिया है।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्धारित राशि जमा करना अपील की सुनवाई के लिए अनिवार्य पूर्व शर्त होगी। साथ ही, याचिकाकर्ता को एक्स-पार्टी असेसमेंट आदेश पारित किए जाने सहित कानून के तहत उपलब्ध सभी बचाव एवं आपत्तियां अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष रखने की स्वतंत्रता दी गई है।
इस आदेश का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हाईकोर्ट ने मूल GST असेसमेंट आदेश को निरस्त नहीं किया है, बल्कि करदाता को वैधानिक अपील के माध्यम से अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। अब अपीलीय प्राधिकारी को प्रस्तुत आपत्तियों और उपलब्ध कानूनी आधारों पर मामले का निर्णय करना होगा।
उल्लेखनीय है कि यह आदेश उन मामलों में महत्वपूर्ण है, जहां करदाता एक्स-पार्टी असेसमेंट और सुनवाई का पर्याप्त अवसर नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए विभागीय कार्रवाई को चुनौती देता है। हालांकि, यह राहत मामले की विशेष परिस्थितियों में दी गई है और इसे सभी GST अपीलों में स्वतः विलंब माफी का सामान्य नियम नहीं माना जा सकता।
