नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), अहमदाबाद बेंच ने Pointleap Projects Private Limited और Superheights Infraspace Private Limited का Adani Electricity Mumbai Limited में विलय मंजूर कर दिया है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि विलय के बाद कर्मचारियों की सेवा में निरंतरता बनी रहेगी और उन पर लागू शर्तें पहले से कम अनुकूल नहीं होंगी।
राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT), अहमदाबाद बेंच ने कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 230 से 232 के तहत दोनों कंपनियों के विलय की योजना को मंजूरी दी। यह विलय 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी होगा।
न्यायिक सदस्य चित्रा हंकारे और तकनीकी सदस्य डॉ. वेलमुर जी. वेंकट चालापति की पीठ ने कहा कि विलय के लिए आवश्यक वैधानिक शर्तों का पालन किया गया है और योजना कंपनियों, उनके शेयरधारकों तथा लेनदारों के हित में है।
दोनों हस्तांतरित कंपनियां Adani Electricity Mumbai Limited की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियां हैं। विलय के बाद उनकी संपत्तियां, अधिकार, देनदारियां और दायित्व मुख्य कंपनी में निहित हो जाएंगे। दोनों कंपनियों का विघटन बिना परिसमापन की प्रक्रिया के किया जाएगा।
आयकर और अन्य वैधानिक देनदारियों की जिम्मेदारी
विलय की सुनवाई के दौरान क्षेत्रीय निदेशक, रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज, आयकर विभाग और आधिकारिक परिसमापक की रिपोर्टों पर विचार किया गया। इनमें लेखांकन प्रक्रिया, सुरक्षित ऋणों से संबंधित रिकॉर्ड, कर देनदारियों और स्टाम्प शुल्क जैसे मुद्दे उठाए गए थे।
आयकर विभाग ने कुछ शर्तों के अधीन योजना पर आपत्ति नहीं जताई। ट्रिब्यूनल के आदेश में Adani Electricity Mumbai Limited के विरुद्ध ₹40,33,150 की बकाया कर मांग का उल्लेख किया गया। आकलन वर्ष 2024 से संबंधित दंड और अपील की कार्यवाही भी लंबित बताई गई।
ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि विलय की मंजूरी से कंपनियों को कर, स्टाम्प शुल्क या अन्य वैधानिक देनदारियों से छूट नहीं मिलेगी। आयकर विभाग कानून के अनुसार कर देनदारियों की जांच और आवश्यक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र रहेगा।
कर्मचारियों की सेवा में नहीं होगा व्यवधान
आदेश का एक महत्वपूर्ण पहलू कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा है। विलय के बाद भारत में कार्यरत हस्तांतरित कंपनियों के कर्मचारी Adani Electricity Mumbai Limited के कर्मचारी बनेंगे। उनकी सेवा में कोई अंतराल या व्यवधान नहीं होगा तथा योजना के तहत उनकी सेवा शर्तें पहले से कम अनुकूल नहीं होंगी।
ट्रिब्यूनल ने कंपनियों को प्रमाणित आदेश रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के समक्ष निर्धारित अवधि में दाखिल करने और स्टाम्प शुल्क के निर्धारण के लिए संबंधित प्राधिकारियों के समक्ष आदेश एवं योजना प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया।
इस प्रकार NCLT ने वैधानिक अनुपालन की शर्तों के साथ विलय योजना को मंजूरी देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।
प्रकरण विवरण: Pointleap Projects Private Limited and Another v. Adani Electricity Mumbai Limited, C.P. (CAA) No. 23 (AHM) of 2026 in C.A. (CAA) No. 12 (AHM) of 2026।
