बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत चल रही कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकल पीठ ने कहा कि साझा गृह (Shared Household), घरेलू संबंध और पीड़ित महिला की स्थिति जैसे सवालों का फैसला साक्ष्यों के आधार पर ट्रायल के दौरान किया जाना चाहिए।
मामला CRMP No. 3610/2025 से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि वे शिकायतकर्ताओं के साथ साझा गृह में नहीं रहते थे, इसलिए घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12 के तहत शिकायत सुनवाई योग्य नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि शिकायत में साझा गृह में रहने और घरेलू हिंसा के आरोप प्रथम दृष्टया मौजूद हैं।
कोर्ट ने प्रभा त्यागी बनाम कमलेश देवी और शौरभ कुमार त्रिपाठी बनाम विधि रावल सहित सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि हाईकोर्ट के पास BNSS की धारा 528 के तहत कार्यवाही रद्द करने की शक्ति है, लेकिन इसका इस्तेमाल सावधानी से किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं को ट्रायल कोर्ट के समक्ष अपनी सभी दलीलें और बचाव प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी।
