एफपीआई निवेश नियमों में भारतीय रिजर्व बैंक की बड़ी राहत, सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश होगा और आसान

Reserve Bank of India RBI

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश संबंधी नियमों को सरल बनाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की है। नए नियामकीय ढांचे के तहत सामान्य मार्ग (General Route) से निवेश करने वाले एफपीआई को अब अल्पकालिक निवेश सीमा, प्रतिभूति-वार सीमा तथा एकाग्रता सीमा (Concentration Limits) का पालन नहीं करना होगा।

आरबीआई के इस निर्णय से विदेशी निवेशकों को अधिक लचीलापन मिलेगा और सरकारी बॉन्ड बाजार में निवेश प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल हो जाएगी। केंद्रीय बैंक ने केंद्रीय सरकारी प्रतिभूतियों (Central Government Securities) और राज्य विकास ऋण प्रतिभूतियों (State Government Securities – SGSs) के लिए पहले से लागू ‘जनरल’ और ‘लॉन्ग-टर्म’ निवेश श्रेणियों को भी एकीकृत कर एकल निवेश सीमा निर्धारित कर दी है।

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय सरकारी प्रतिभूतियों में एफपीआई निवेश की संशोधित सीमा पहली छमाही में 4,62,490 करोड़ रुपये तथा दूसरी छमाही में 4,77,006 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। वहीं, राज्य विकास ऋण प्रतिभूतियों के लिए यह सीमा पहली छमाही में 1,53,043 करोड़ रुपये और दूसरी छमाही में 1,64,242 करोड़ रुपये तय की गई है।

आरबीआई द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार, ये संशोधित निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। माना जा रहा है कि इस कदम से भारतीय ऋण बाजार में विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और निवेशकों के लिए अनुपालन संबंधी प्रक्रियाएं आसान होंगी।