भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने म्यूचुअल फंडों को अस्थायी नकदी की कमी से निपटने के लिए इंट्राडे उधारी (एक ही कारोबारी दिन के भीतर ली और चुकाई जाने वाली उधारी) की अनुमति दे दी है। इस संबंध में सेबी ने शुक्रवार को एक परिपत्र जारी किया। यह व्यवस्था 1 सितंबर से प्रभावी होगी।
सेबी ने बताया कि हाल ही में अधिसूचित सेबी (म्यूचुअल फंड) विनियम, 2026 में संशोधन के बाद म्यूचुअल फंडों को परिचालन संबंधी आवश्यकताओं के लिए कारोबार के दौरान अल्पकालिक उधारी लेने की अनुमति प्रदान की गई है। इसका उद्देश्य बाजार में निपटान (सेटलमेंट) के समय में होने वाले अंतर के कारण उत्पन्न होने वाली अस्थायी तरलता संबंधी समस्याओं का समाधान करना है।
नए नियमों के तहत म्यूचुअल फंड इंट्राडे उधारी का उपयोग निवेशकों के रिडेम्प्शन भुगतान, लाभांश वितरण, ब्याज भुगतान, निवेशों के निपटान, मार्क-टू-मार्केट दायित्वों, विदेशी मुद्रा लेनदेन के निपटान तथा मौजूदा उधारी के पुनर्भुगतान जैसे कार्यों के लिए कर सकेंगे।
सेबी ने स्पष्ट किया है कि ऐसी उधारी की सीमा मुख्य रूप से उसी दिन प्राप्त होने वाली संभावित राशि, जैसे निवेशकों की सदस्यता से प्राप्त धन, क्लियरिंग कॉरपोरेशन से मिलने वाले भुगतान, परिपक्व निवेशों से प्राप्त राशि और अन्य देय प्राप्तियों के आधार पर तय की जाएगी। हालांकि, निवेशकों के रिडेम्प्शन और अन्य भुगतान दायित्वों को पूरा करने के लिए आवश्यक होने पर अतिरिक्त उधारी की भी अनुमति होगी।
नियामक ने यह भी निर्देश दिया है कि सभी एसेट मैनेजमेंट कंपनियां (एएमसी) यह सुनिश्चित करें कि इंट्राडे उधारी का पूरा भुगतान उसी कारोबारी दिन के समाप्त होने से पहले कर दिया जाए। यदि किसी कारणवश यह उधारी रातभर जारी रहती है, तो वह म्यूचुअल फंडों पर लागू मौजूदा नियामकीय उधारी सीमा के भीतर ही होनी चाहिए।
इसके अलावा, सेबी ने एएमसी के निदेशक मंडल और ट्रस्टी बोर्ड के लिए इंट्राडे उधारी के उपयोग संबंधी स्पष्ट नीति को मंजूरी देना अनिवार्य किया है। इस नीति का विवरण संबंधित एएमसी की वेबसाइट पर भी सार्वजनिक करना होगा।
सेबी ने यह भी स्पष्ट किया है कि इंट्राडे उधारी पर आने वाला खर्च या अपेक्षित धन समय पर प्राप्त न होने से होने वाला कोई भी नुकसान एएमसी स्वयं वहन करेगी। इसका बोझ म्यूचुअल फंड निवेशकों पर नहीं डाला जा सकेगा।
