CJI Surya Kant ने न्यायपालिका में पारदर्शिता और जनविश्वास को बताया जरूरी, न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायत तंत्र को मजबूत बताया

CJI Surya Kant

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने न्यायपालिका में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनविश्वास को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतों के निपटारे के लिए विकसित तंत्र मजबूत, बेहद संवेदनशील और समयबद्ध है। हालांकि, उन्होंने न्यायिक व्यवस्था में लगातार सुधार और अधिक पारदर्शिता की जरूरत भी रेखांकित की।

राम जेठमलानी स्मृति व्याख्यान में CJI का संबोधन

मुख्य न्यायाधीश ने नई दिल्ली में आयोजित छठे राम जेठमलानी स्मृति व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया। इस वर्ष व्याख्यान का विषय “Justice Seen to Be Done: Transparency and Public Trust as Pillars of the Legal System” था।

अपने संबोधन में CJI सूर्यकांत ने कहा कि किसी भी संस्थान के लिए सुधार एक निरंतर प्रक्रिया होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुधार को सामान्य नियम बने रहना चाहिए और कोई भी संस्था स्थिर बने रहने पर गर्व नहीं कर सकती।

न्यायपालिका को आलोचना से परे नहीं होना चाहिए

CJI ने कहा कि न्यायपालिका ने स्वयं आलोचना के महत्व को स्वीकार किया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस दृष्टिकोण को दोहराया कि न्यायपालिका आलोचना से विमुख नहीं है और न ही हो सकती है।

उन्होंने कहा कि न्यायिक कार्यप्रणाली की निष्पक्ष, सूचित और रचनात्मक आलोचना एक जीवंत संवैधानिक लोकतंत्र का वैध और आवश्यक हिस्सा है।

पारदर्शिता से मजबूत होता है न्यायपालिका पर भरोसा

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यही सिद्धांत न्यायिक पारदर्शिता के केंद्र में है। कोई भी अदालत यह उम्मीद नहीं कर सकती कि वह खुद को जांच और सवालों से ऊपर रखकर जनता का विश्वास हासिल कर लेगी।

उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को अपने कामकाज की जांच, सवालों और आवश्यकता पड़ने पर आलोचना के लिए खुला रहना चाहिए। इससे न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता और संस्थागत जवाबदेही मजबूत होती है।

जनविश्वास और जनस्वीकृति में अंतर

CJI सूर्यकांत ने जनविश्वास और जनस्वीकृति के बीच अंतर भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि वास्तविक जनविश्वास केवल तब स्थापित होता है, जब किसी मामले में हारने वाला व्यक्ति भी यह मानता रहे कि उसके साथ न्याय हुआ और पूरी न्यायिक प्रक्रिया निष्पक्ष थी।

उन्होंने संकेत दिया कि न्यायपालिका में विश्वास का आधार केवल फैसलों का परिणाम नहीं, बल्कि निष्पक्ष और पारदर्शी न्यायिक प्रक्रिया है।

न्यायिक सुधार लगातार जारी रहना चाहिए

CJI के संबोधन का मुख्य संदेश यह रहा कि न्यायपालिका की मजबूती के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही, आलोचना के प्रति openness और निरंतर सुधार आवश्यक हैं। न्यायिक संस्थानों को जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए समय के साथ अपनी प्रक्रियाओं में सुधार करते रहना चाहिए।