छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने JK लक्ष्मी सीमेंट पर भूजल शुल्क बरकरार रखा

JUSTICE RAKESH MOHAN PANDEY, JUDGE HIGH COURT OF CHHATTISGARH

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने JK लक्ष्मी सीमेंट से सात बोरवेल के जरिए निकाले जा रहे भूजल पर लगाए गए जल शुल्क को वैध ठहराया है। जस्टिस राकेश मोहन पांडेय ने कंपनी की दो याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि औद्योगिक उपयोग के लिए प्राकृतिक या स्वयं के स्रोत से निकाले गए पानी पर शुल्क लगाने का कानूनी प्रावधान मौजूद है।

कंपनी से वर्ष 2016-17 से 2018-19 के लिए 38.57 लाख रुपये की मांग की गई थी। इसके बाद संशोधित दरों के आधार पर वर्ष 2016-17 से 2019-20 के लिए 61.58 लाख रुपये की नई मांग जारी की गई।

कंपनी ने तर्क दिया था कि उसके पास केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) की NOC है और राज्य सरकार द्वारा भूजल निकालने पर शुल्क लगाने का कोई स्वतंत्र कानूनी आधार नहीं है। हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि CGWA की अनुमति पर्यावरणीय नियमन से संबंधित है और इससे राज्य के कानूनों के तहत देय जल शुल्क से छूट नहीं मिलती।

कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सिंचाई अधिनियम, 1931 की धारा 26 और 40 तथा सिंचाई नियम, 1974 के नियम 71-A का हवाला देते हुए कहा कि प्राकृतिक या स्वयं के स्रोत से औद्योगिक उपयोग के लिए निकाले गए पानी पर शुल्क लगाया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी माना कि भूजल प्राकृतिक जल संसाधन के दायरे में आता है।

हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य द्वारा अन्य उद्योगों के खिलाफ समान कार्रवाई नहीं किए जाने से कंपनी को वैधानिक दायित्व से बचने का अधिकार नहीं मिलता। अदालत ने दोनों याचिकाएं खारिज करते हुए कंपनी को निर्धारित मांग का पालन करने का निर्देश दिया।