तमिलनाडु मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन ने NEET सुपर स्पेशियलिटी (NEET-SS) की रिक्त इन-सर्विस सीटों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में संशोधन आवेदन दायर किया है। एसोसिएशन ने 28 जुलाई 2026 के उस आदेश में बदलाव की मांग की है, जिसमें अदालत ने कहा था कि यदि दूसरे चरण की काउंसलिंग के बाद NEET-SS की क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल कम की जाती है, तो बची हुई रिक्त सीटों में से केवल 50 प्रतिशत सीटें ही तमिलनाडु सरकार को वापस दी जाएंगी, जबकि शेष सीटें डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) के पास रहेंगी।
क्या था सुप्रीम कोर्ट का 28 जुलाई का आदेश?
28 जुलाई 2026 को न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया था कि वह 151 सुपर स्पेशियलिटी सीटें 29 जुलाई तक DGHS को सौंप दे, ताकि उन्हें ऑल इंडिया कोटा (AIQ) की दूसरी चरण की काउंसलिंग में शामिल किया जा सके।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि काउंसलिंग वर्तमान क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल के आधार पर होगी। यदि बाद में क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल घटाई जाती है, तो बची हुई रिक्त सीटों में से केवल आधी सीटें ही राज्य को लौटेंगी और बाकी DGHS के पास रहेंगी।
एसोसिएशन ने क्यों उठाई आपत्ति?
तमिलनाडु मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन का कहना है कि ये 151 सीटें राज्य की 50 प्रतिशत इन-सर्विस आरक्षण व्यवस्था का हिस्सा हैं, जिसे 7 नवंबर 2020 के सरकारी आदेश (G.O. Ms. No. 462) के तहत लागू किया गया था। इस आरक्षण की संवैधानिक वैधता को सुप्रीम कोर्ट ने Tamil Nadu Medical Officers Association v. Union of India (2021) में भी बरकरार रखा था।
एसोसिएशन का तर्क है कि DGHS को इन सीटों पर कोई स्थायी अधिकार, स्वामित्व या दावा प्राप्त नहीं है। इन सीटों को केवल अस्थायी व्यवस्था के तहत AIQ काउंसलिंग के लिए भेजा जाता है ताकि सीटें खाली न रहें। इसलिए यदि बाद में सीटें रिक्त रह जाती हैं, तो उन्हें पूरी तरह तमिलनाडु सरकार को वापस मिलना चाहिए।
पिछले वर्षों की व्यवस्था का दिया हवाला
याचिका में कहा गया है कि 2024-25 शैक्षणिक सत्र में AIQ काउंसलिंग के दूसरे चरण के बाद रिक्त बची 58 सीटें पूरी तरह राज्य सरकार को लौटा दी गई थीं। इससे स्पष्ट है कि अब तक यही स्थापित प्रक्रिया रही है।
एसोसिएशन का कहना है कि 28 जुलाई के आदेश का पैराग्राफ-4 इस स्थापित व्यवस्था से अलग है और इससे राज्य के पात्र इन-सर्विस डॉक्टरों के अवसर प्रभावित होंगे।
सुप्रीम कोर्ट से क्या राहत मांगी गई है?
संशोधन आवेदन में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि 28 जुलाई के आदेश के पैराग्राफ-4 में संशोधन किया जाए और यह निर्देश दिया जाए कि यदि दूसरे चरण की काउंसलिंग के बाद क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल कम होती है, तो सभी शेष रिक्त सीटें तमिलनाडु सरकार को वापस दी जाएं, ताकि उनका आवंटन राज्य की इन-सर्विस आरक्षण नीति के अनुसार किया जा सके।
इसके अलावा, एसोसिएशन ने यह भी मांग की है कि यदि पर्सेंटाइल कम होने के बाद सीटें उपलब्ध होती हैं, तो पात्र इन-सर्विस डॉक्टरों को तीसरे चरण अथवा मॉप-अप राउंड की काउंसलिंग में इन सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति दी जाए।
मामले का महत्व
याचिका में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2022 से सुप्रीम कोर्ट लगातार तमिलनाडु की 50 प्रतिशत इन-सर्विस आरक्षण व्यवस्था को जारी रखने की अनुमति देता रहा है। ऐसे में यदि रिक्त सीटें DGHS के पास ही बनी रहती हैं, तो राज्य की आरक्षण नीति का उद्देश्य प्रभावित होगा। इसलिए एसोसिएशन ने अदालत से अनुरोध किया है कि सभी रिक्त सीटें अंततः तमिलनाडु सरकार को लौटाई जाएं ताकि उनका लाभ राज्य के पात्र सरकारी चिकित्सकों को मिल सके।
