₹1.50 लाख लेकर नौकरी नहीं दिलाने के मामले में आरोपी को अग्रिम जमानत, आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होने पर हाईकोर्ट ने दी राहत

बिलासपुर, 31 जुलाई। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नौकरी दिलाने के नाम पर ₹1.50 लाख लेने और न तो नौकरी दिलाने तथा न ही रकम लौटाने के आरोप का सामना कर रहे एक युवक को अग्रिम जमानत प्रदान कर दी है। न्यायालय ने कहा कि प्रथम दृष्टया आवेदक के विरुद्ध मामला विचारणीय है, लेकिन उसके विरुद्ध कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। ऐसे में मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना उसे अग्रिम जमानत का लाभ दिया जाना उचित होगा।

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने एमसीआरसीए क्रमांक 1199/2026, संदीप गुप्ता बनाम छत्तीसगढ़ राज्य में पारित किया। आवेदक की ओर से अधिवक्ता सविता तिवारी ने पक्ष रखा, जबकि राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता एस.एस. बघेल उपस्थित हुए।

अभियोजन के अनुसार, अंबिकापुर थाना क्षेत्र में दर्ज अपराध क्रमांक 83/2026 में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि संदीप गुप्ता ने उसे नौकरी दिलाने का आश्वासन देकर ₹1.50 लाख प्राप्त किए। आरोप है कि न तो नौकरी दिलाई गई और न ही राशि वापस की गई। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज किया।

गिरफ्तारी की आशंका के चलते आरोपी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 482 के तहत अग्रिम जमानत याचिका दायर की। बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि आवेदक को झूठा फंसाया गया है और उसके विरुद्ध पहले कभी कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ है। इसलिए उसे गिरफ्तारी से संरक्षण दिया जाना चाहिए।

राज्य सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोप गंभीर हैं और आरोपी को अग्रिम जमानत नहीं दी जानी चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि आवेदक का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और इस स्तर पर उसकी गिरफ्तारी आवश्यक प्रतीत नहीं होती।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने अपने आदेश में कहा, “मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना न्यायालय का मत है कि वर्तमान परिस्थितियों में आवेदक अग्रिम जमानत का पात्र है।” इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि यह टिप्पणी केवल जमानत याचिका के निस्तारण तक सीमित है और इसका मुकदमे की सुनवाई पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।