सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता से समझौते के बाद उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला को दिया तलाक

Supreme Court of India

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी अलग रह रही पत्नी पायल अब्दुल्ला के बीच वर्षों से चल रहे वैवाहिक विवाद का शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में अंत हो गया। दोनों पक्षों ने न्यायालय को बताया कि मध्यस्थता (मेडिएशन) की प्रक्रिया के माध्यम से उन्होंने आपसी सहमति से सभी मतभेद और लंबित विवाद सुलझा लिए हैं।

न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने उमर अब्दुल्ला की अपील का निस्तारण करते हुए कार्यवाही समाप्त कर दी। उमर अब्दुल्ला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि दोनों पक्षों के बीच पूर्ण समझौता हो चुका है और वे सभी संबंधित मामलों को वापस लेने पर सहमत हैं।

उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला का विवाह सितंबर 1994 में हुआ था, लेकिन दोनों पिछले कई वर्षों से अलग रह रहे थे। वर्ष 2016 में पारिवारिक न्यायालय ने उमर अब्दुल्ला की तलाक याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि वह क्रूरता, परित्याग या विवाह के अपूरणीय रूप से टूट जाने जैसे आधार साबित करने में सफल नहीं हुए हैं। न्यायालय ने यह भी माना था कि ऐसा कोई ठोस कारण प्रस्तुत नहीं किया गया जिससे यह कहा जा सके कि वैवाहिक संबंध को जारी रखना पूरी तरह असंभव हो गया है।

इसके बाद उमर अब्दुल्ला ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दायर की, लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली। इसके पश्चात उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। यह प्रावधान सर्वोच्च न्यायालय को पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए विशेष परिस्थितियों में आवश्यक आदेश पारित करने का अधिकार देता है। अतीत में भी सुप्रीम कोर्ट इस शक्ति का उपयोग उन मामलों में कर चुका है, जहां विवाह का संबंध पूरी तरह समाप्त हो चुका हो।

अगस्त 2024 में दोनों पक्षों की सहमति से सुप्रीम कोर्ट ने मामले को मध्यस्थता के लिए भेज दिया था। मध्यस्थता की रिपोर्ट आने तक सुनवाई स्थगित रखी गई थी।

मध्यस्थता सफल रहने और सभी लंबित विवादों के समाधान के बाद सुप्रीम कोर्ट ने समझौते की शर्तों के अनुरूप विवाह विच्छेद को मंजूरी देते हुए उमर अब्दुल्ला की अपील का निस्तारण कर दिया। इसके साथ ही वर्षों से लंबित यह वैवाहिक विवाद भी समाप्त हो गया।