सुप्रीम कोर्ट की चुनाव समिति ने राज्य बार काउंसिल की सीटें बढ़ाने के BCI के प्रस्ताव पर लगाई रोक

Supreme Court of India

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई-पावर्ड इलेक्शन सुपरवाइजरी कमेटी ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के उस प्रस्ताव के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है, जिसमें राज्य बार काउंसिलों में निर्वाचित सदस्यों की संख्या बढ़ाने की बात कही गई थी। समिति ने कहा कि चल रही चुनाव प्रक्रिया के दौरान ऐसा निर्णय अधिवक्ता अधिनियम, 1961 तथा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों के अनुरूप नहीं है।

पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति ने 23 जुलाई 2026 को यह आदेश पारित किया। समिति में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा तथा वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरि भी शामिल हैं। यह आदेश BCI के 19 जुलाई 2026 के प्रस्ताव और 21 जुलाई को जारी उसके पत्र के विरुद्ध दायर अपील पर सुनवाई के दौरान दिया गया।

BCI ने महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने के उद्देश्य से राज्य बार काउंसिलों की सदस्य संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था। इसके तहत पहले से निर्वाचित सदस्य अपने पद पर बने रहते और महिलाओं के लिए अतिरिक्त सीटें सृजित की जातीं।

हालांकि समिति ने स्पष्ट किया कि वर्तमान चुनाव निर्धारित सीटों की संख्या के आधार पर कराए जा रहे हैं और कई राज्यों में परिणाम भी घोषित हो चुके हैं। ऐसे में चुनाव प्रक्रिया के बीच सीटों की संख्या बढ़ाना अधिवक्ता अधिनियम, 1961 तथा 8 दिसंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन होगा।

सुनवाई के दौरान BCI के अतिरिक्त सचिव अवनीश पांडे ने समिति को बताया कि यह केवल एक प्रस्ताव है और इसे कानून के अनुसार आवश्यक स्वीकृतियां मिलने के बाद ही लागू किया जाएगा। इस पर समिति ने कहा कि जब तक सक्षम प्राधिकारी और आवश्यकता पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी प्राप्त नहीं होती, तब तक प्रस्ताव प्रभावी नहीं माना जा सकता।

समिति ने देशभर की सभी हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटियों और रिटर्निंग अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे 19 जुलाई 2026 के BCI प्रस्ताव तथा 21 जुलाई के पत्र पर कोई कार्रवाई न करें। साथ ही मतगणना 9 फरवरी 2026 के पूर्व आदेश के अनुसार ही जारी रखने को कहा गया है।

समिति ने BCI के प्रधान सचिव को यह आदेश सभी संबंधित चुनाव समितियों और रिटर्निंग अधिकारियों तक पहुंचाने तथा अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा था कि यदि बार काउंसिलों की सीटों की संख्या बढ़ाई जाती है तो महिलाओं का प्रतिनिधित्व भी उसी अनुपात में बढ़ाया जाना चाहिए।