बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त नकदी उपलब्ध रहने के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 9 जुलाई को 1.10 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध तरलता अवशोषित की। आरबीआई के नवीनतम मनी मार्केट ऑपरेशंस के आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने 5 प्रतिशत ब्याज दर पर स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (एसडीएफ) के माध्यम से 1.67 लाख करोड़ रुपये की राशि अवशोषित की, जबकि 5.26 प्रतिशत रेपो दर पर 46,729 करोड़ रुपये की तरलता बैंकिंग प्रणाली में उपलब्ध कराई।
इन दोनों परिचालनों के बाद दिन के अंत में बैंकिंग प्रणाली से 1.20 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध तरलता अवशोषित हुई। विभिन्न लंबित तरलता सुविधाओं को समायोजित करने के बाद कुल शुद्ध तरलता अवशोषण 1.10 लाख करोड़ रुपये रहा। यह स्थिति दर्शाती है कि बैंकिंग प्रणाली में नकदी की उपलब्धता अभी भी पर्याप्त बनी हुई है।
रात्रिकालीन मुद्रा बाजार में भी गतिविधियां मजबूत रहीं। 9 जुलाई को ओवरनाइट मनी मार्केट में कुल 6.91 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन हुए, जिनकी भारित औसत ब्याज दर 5.28 प्रतिशत रही। इनमें ट्राइपार्टी रेपो खंड का योगदान सबसे अधिक 4.81 लाख करोड़ रुपये का रहा। इसके बाद मार्केट रेपो में 1.78 लाख करोड़ रुपये तथा कॉल मनी बाजार में 24,893 करोड़ रुपये के लेनदेन दर्ज किए गए।
आरबीआई के अनुसार, 9 जुलाई तक बैंकों ने केंद्रीय बैंक के पास 7.88 लाख करोड़ रुपये का नकद शेष बनाए रखा, जो 15 जुलाई को समाप्त होने वाले पखवाड़े के लिए निर्धारित औसत नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) की 7.98 लाख करोड़ रुपये की आवश्यकता से थोड़ा कम है।
आंकड़ों से यह भी स्पष्ट हुआ कि 15 जून तक देश में शुद्ध दीर्घकालिक तरलता अधिशेष 4.82 लाख करोड़ रुपये रहा, जिससे संकेत मिलता है कि वित्तीय प्रणाली में तरलता की स्थिति फिलहाल सहज और संतोषजनक बनी हुई है।
