राजपाल यादव को चेक बाउंस मामलों में राहत नहीं, दिल्ली हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए सुनाई तीन महीने की सजा

Delhi High Court

दिल्ली हाईकोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को बड़ा झटका देते हुए चेक अनादरण (Cheque Bounce) के सात मामलों में उनकी दोषसिद्धि को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति स्वराणा कांता शर्मा की एकलपीठ ने अभिनेता को प्रत्येक मामले में तीन महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। हालांकि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी, जिससे उन्हें कुल तीन महीने की ही सजा भुगतनी होगी।

अदालत ने प्रत्येक मामले में राजपाल यादव को शिकायतकर्ता कंपनी एम/एस मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को 1.05 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया। इसके अतिरिक्त उनकी पत्नी राधा राजपाल यादव को भी प्रत्येक मामले में 5 लाख रुपये से अधिक की राशि का भुगतान करने का आदेश दिया गया।

यह मामला परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (Negotiable Instruments Act, 1881) के तहत दर्ज सात चेक बाउंस मामलों से संबंधित है। हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालतों ने उपलब्ध साक्ष्यों का सही मूल्यांकन किया था और समझौते के दौरान अभिनेता द्वारा जमा की गई राशि को पहले ही मुआवजे और जुर्माने का निर्धारण करते समय ध्यान में रखा गया था। इसलिए निचली अदालतों के फैसले में किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि, अवैधता या विकृति नहीं पाई गई।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पूर्व में राजपाल यादव ने विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने और बकाया राशि का भुगतान करने का आश्वासन दिया था। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने उनकी सजा पर अंतरिम रोक लगाई थी और मामले को दिल्ली हाईकोर्ट मध्यस्थता एवं सुलह केंद्र भेजा था। लेकिन कई अवसर, समय-वृद्धि और आश्वासनों के बावजूद उन्होंने अदालत के समक्ष दिए गए अपने वचनों का पालन नहीं किया।

न्यायालय ने कहा कि अभिनेता और उनके अधिवक्ता ने कई बार भुगतान का भरोसा दिलाया, लेकिन तय समय पर राशि जमा नहीं की गई। अदालत ने इसे न्यायालय को दिए गए आश्वासनों का लगातार उल्लंघन माना।

फैसले में यह भी उल्लेख किया गया कि मुकदमे के दौरान शिकायतकर्ता कंपनी को लगभग 2.25 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जबकि पूर्व की कार्यवाहियों में 4 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दिए जाने का भी रिकॉर्ड मौजूद है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पहले से जमा की गई सभी राशियों का समायोजन अंतिम देय मुआवजे और जुर्माने की गणना में किया जाएगा।

मामले की शुरुआत मई 2024 में सत्र न्यायालय के उस फैसले से हुई थी, जिसमें राजपाल यादव को दोषी ठहराते हुए छह महीने के कारावास की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में दोषसिद्धि और सजा को चुनौती दी थी।

फरवरी 2026 में हाईकोर्ट ने यह पाते हुए कि अभिनेता ने अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किया है, उन्हें जेल अधीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था। समय बढ़ाने की उनकी मांग भी अदालत ने अस्वीकार कर दी थी और स्पष्ट कहा था कि किसी व्यक्ति को केवल उसके पेशे या फिल्म उद्योग से जुड़े होने के कारण विशेष रियायत नहीं दी जा सकती।

बाद में राजपाल यादव ने 5 फरवरी 2026 को आत्मसमर्पण किया और शिकायतकर्ता कंपनी को 1.5 करोड़ रुपये जमा करने के बाद उन्हें अंतरिम राहत मिली। हालांकि अदालत ने पाया कि इसके बाद भी उन्होंने शेष बकाया राशि का भुगतान नहीं किया और बार-बार दिए गए अपने आश्वासनों का पालन नहीं किया।

इन परिस्थितियों को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि अब और उदारता दिखाने का कोई औचित्य नहीं है। अदालत ने उनकी दोषसिद्धि, सजा और मुआवजे के आदेश को बरकरार रखते हुए तीन महीने के साधारण कारावास की सजा लागू कर दी। साथ ही, राजपाल यादव को सर्वोच्च न्यायालय में इस निर्णय को चुनौती देने के लिए दो महीने का समय भी प्रदान किया गया।