एमपी के अस्पताल में कथित चिकित्सकीय लापरवाही से डेढ़ वर्षीय मासूम की गई आंखों की रोशनी, एनएचआरसी ने मांगी दो सप्ताह में रिपोर्ट

National Human Rights Commission

मध्य प्रदेश के सागर जिले के बांदा सिविल अस्पताल में कथित चिकित्सकीय लापरवाही के कारण डेढ़ वर्षीय मासूम की आंखों की रोशनी चले जाने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने इस घटना को गंभीर मानते हुए मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

आयोग के अनुसार, मीडिया में प्रकाशित खबर के मुताबिक मासूम को सर्दी और आंखों में लालिमा की शिकायत होने पर बांदा सिविल अस्पताल ले जाया गया था। आरोप है कि उपचार के दौरान चिकित्सकों ने आंखों की दवा की जगह नाक में डाली जाने वाली दवा (नेजल ड्रॉप्स) आंखों में डाल दी। इसके बाद बच्चे की आंखों में गंभीर संक्रमण हो गया और अंततः उसकी दृष्टि चली गई।

एनएचआरसी ने कहा है कि यदि मीडिया रिपोर्ट में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला है। ऐसे मामलों में चिकित्सा संस्थानों की जवाबदेही और मरीजों, विशेषकर बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसी कारण आयोग ने राज्य सरकार से पूरे घटनाक्रम, जांच की स्थिति, उपचार की प्रक्रिया तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों या कर्मचारियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई का विस्तृत विवरण मांगा है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, घटना के बाद बच्चे को बेहतर इलाज के लिए पहले जिला अस्पताल और बाद में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भोपाल भेजा गया। वहां चिकित्सकों ने परिजनों को बताया कि बच्चे की आंखों की रोशनी वापस लाना संभव नहीं है

यह मामला सरकारी अस्पतालों में उपचार की गुणवत्ता, दवा वितरण की प्रक्रिया और चिकित्सकीय सतर्कता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। एनएचआरसी अब राज्य सरकार से प्राप्त होने वाली रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई और आवश्यक अनुशंसाओं पर निर्णय करेगा।