सीजी रेरा का बड़ा फैसला: सोसायटी को हैंडओवर होने तक मेंटेनेंस शुल्क देना होगा, डिफॉल्टर फ्लैट मालिक को 45 दिन में भुगतान का आदेश

RERA - Real Estate Regulatory Authority

रायपुर – छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (सीजी रेरा) ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि जब तक किसी आवासीय परियोजना का प्रबंधन विधिवत रूप से रहवासी समिति या एसोसिएशन को हस्तांतरित नहीं हो जाता, तब तक परियोजना के रखरखाव की जिम्मेदारी प्रमोटर की होगी और वह आवंटियों से उचित मेंटेनेंस शुल्क वसूलने का अधिकार रखता है। यह फैसला रेरा अधिनियम, 2016 के तहत प्रमोटरों और फ्लैट खरीदारों दोनों के अधिकारों और दायित्वों को स्पष्ट करने वाला माना जा रहा है।

यह आदेश 2 जुलाई 2026 को सीजी रेरा, रायपुर के अध्यक्ष संजय शुक्ला और सदस्य धनंजय देवांगन की पीठ ने मेसर्स आधारशिला डेवलपर्स बनाम संजीव कुमार जैन प्रकरण में पारित किया। मामला रायपुर स्थित पंजीकृत रेरा परियोजना “साम्राज्य रेसिडेंसी” से जुड़ा था, जिसमें प्रमोटर ने एक फ्लैट मालिक द्वारा लंबे समय से मेंटेनेंस शुल्क जमा नहीं करने की शिकायत दर्ज कराई थी।

रेरा के समक्ष प्रस्तुत शिकायत में बताया गया कि संबंधित फ्लैट खरीदार ने वर्ष 2021 में बिक्री विलेख के माध्यम से फ्लैट खरीदा था तथा परियोजना में कब्जा भी प्राप्त कर लिया था। परियोजना को 8 जनवरी 2024 को सक्षम प्राधिकारी से पूर्णता प्रमाण-पत्र (Completion Certificate) भी मिल चुका है। इसके बावजूद फ्लैट मालिक ने बार-बार अनुरोध किए जाने के बाद भी सामान्य क्षेत्र के रखरखाव और अन्य सुविधाओं का लाभ लेने के बावजूद निर्धारित मेंटेनेंस शुल्क का भुगतान नहीं किया। प्रमोटर का कहना था कि इससे रखरखाव का पूरा आर्थिक भार उसे स्वयं उठाना पड़ रहा है।

प्रमोटर ने रेरा अधिनियम, 2016 की धारा 11(4)(घ), धारा 19(6) और धारा 19(7) का हवाला देते हुए कहा कि जब तक परियोजना का रखरखाव रहवासी समिति को हस्तांतरित नहीं होता, तब तक आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराना उसकी कानूनी जिम्मेदारी है। साथ ही प्रत्येक आवंटी पर समय पर मेंटेनेंस शुल्क का भुगतान करना भी वैधानिक दायित्व है। शिकायत के अनुसार अप्रैल 2023 से दिसंबर 2025 तक का कुल बकाया, जीएसटी सहित, 83,721 रुपये था।

सुनवाई के दौरान रेरा ने पाया कि परियोजना को सहकारी समिति को हस्तांतरित करने के लिए पूर्व में आदेश पारित किया जा चुका था, लेकिन वास्तविक हस्तांतरण अब तक नहीं हुआ है। ऐसे में प्रमोटर अभी भी परियोजना के रखरखाव के लिए उत्तरदायी है और वह आवंटियों से उचित मेंटेनेंस शुल्क वसूलने का कानूनी अधिकार रखता है। प्राधिकरण ने अपने आदेश में कहा कि “जब तक आवंटियों का संघ परियोजना का रखरखाव अपने हाथ में नहीं ले लेता, तब तक प्रमोटर आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने और उनका रखरखाव करने के लिए उत्तरदायी रहेगा।”

रेरा ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध खर्चों का परीक्षण करते हुए 1.993 रुपये प्रति वर्गफुट प्रति माह की दर से निर्धारित मेंटेनेंस शुल्क को उचित माना। हालांकि सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि परियोजना के लगभग 50 आवंटियों को वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए 9,636 रुपये की छूट दी गई थी। समानता के सिद्धांत को लागू करते हुए प्राधिकरण ने निर्देश दिया कि यही राहत संबंधित फ्लैट मालिक को भी दी जाएगी।

छूट का लाभ देने के बाद सीजी रेरा ने संबंधित आवंटी को 59,617 रुपये (जीएसटी सहित) का बकाया मेंटेनेंस शुल्क 45 दिनों के भीतर प्रमोटर को भुगतान करने का आदेश दिया। इसके अतिरिक्त अधिनियम की धारा 18 और नियम 17 के तहत 10.80 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से 5,634 रुपये ब्याज का भुगतान करने का भी निर्देश दिया गया।

यह फैसला देशभर की उन आवासीय परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जहां परियोजना का प्रबंधन अभी तक रहवासी समिति को हस्तांतरित नहीं हुआ है। आदेश से यह स्पष्ट संदेश गया है कि ऐसी स्थिति में फ्लैट मालिक मेंटेनेंस शुल्क देने से इंकार नहीं कर सकते। वहीं, यदि प्रमोटर किसी वर्ग के आवंटियों को कोई छूट देता है, तो समान परिस्थितियों वाले अन्य आवंटियों को भी वही लाभ देना होगा। यह निर्णय रेरा अधिनियम के तहत प्रमोटरों और फ्लैट खरीदारों के अधिकारों एवं दायित्वों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।