नई दिल्ली में प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय (पीएमएमएल) आज “वॉकिंग विद लेगेसी: फ्रॉम नेसेसिटी टू आइडेंटिटी” शीर्षक से एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन करेगा। यह प्रदर्शनी पीएमएमएल के तोशाखाना संग्रह से चुनी गई ऐतिहासिक छड़ियों (वॉकिंग स्टिक्स) और बैटनों का विशेष प्रदर्शन है, जिनके माध्यम से शासन, सामाजिक प्रतिष्ठा और व्यक्तिगत पहचान के विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत किया जाएगा।
प्रदर्शनी में प्रदर्शित छड़ियां और बैटन केवल सहारे के साधन नहीं हैं, बल्कि वे भारतीय शिल्पकला, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा भी हैं। इन वस्तुओं का निर्माण उनके उपयोग और उद्देश्य के अनुसार साधारण से लेकर अत्यंत अलंकृत स्वरूप में किया गया है।
इनकी मूठ और डंडों को हाथीदांत, हड्डी, पीतल, चांदी, तांबा, सोना, रत्नों और मीनाकारी जैसे बहुमूल्य पदार्थों से सजाया गया है। इन्हें सुरक्षित और टिकाऊ बनाने के लिए मोम, तेल, शेलैक और वार्निश जैसी परतों का उपयोग किया गया है।
प्रदर्शनी में आबनूस, महोगनी, शीशम, सागौन, गुलाब की लकड़ी, बांस, मलक्का केन तथा अन्य कठोर लकड़ियों से निर्मित दुर्लभ छड़ियां और बैटन प्रदर्शित किए जाएंगे। इनके निर्माण में पारंपरिक काष्ठकला की तकनीकों जैसे लकड़ी को परिपक्व करना, आकार देना, घुमाकर तराशना और चमकाना शामिल है।
दर्शकों को इन ऐतिहासिक वस्तुओं पर उकेरी गई प्राकृतिक आकृतियां, पुष्प एवं ज्यामितीय डिज़ाइन, पारिवारिक प्रतीक चिह्न, राजचिह्न, उत्कीर्ण लेख तथा प्राकृतिक लकड़ी की चमक के साथ की गई लाखकारी जैसी उत्कृष्ट कलाकृतियां भी देखने को मिलेंगी। यह प्रदर्शनी भारतीय शिल्प परंपरा, सौंदर्यबोध और ऐतिहासिक विरासत को करीब से समझने का एक विशेष अवसर प्रदान करेगी।
