नई दिल्ली। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने 12 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में अपना 33वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर बदलती वैश्विक परिस्थितियों, तकनीकी विकास और सामाजिक-आर्थिक असमानताओं के बीच मानवाधिकारों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना 12 अक्टूबर 1993 को मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत की गई थी। आयोग का प्रमुख उद्देश्य देश में मानवाधिकारों के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देना तथा मानवाधिकारों के उल्लंघन से संबंधित मामलों पर कार्रवाई करना है।
स्वास्थ्य और शिक्षा में प्रगति के बावजूद चुनौतियां बरकरार
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए NHRC इंडिया के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यम ने कहा कि दुनिया ने स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और जीवन स्तर के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। इसके बावजूद जलवायु परिवर्तन, आर्थिक असमानता और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों की समस्याएं आज भी लाखों लोगों को प्रभावित कर रही हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मानवाधिकारों की सुरक्षा केवल कानूनी अधिकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा, स्वतंत्रता और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने से भी है।
डिजिटल निजता और निगरानी पर बढ़ती चिंता
न्यायमूर्ति रामासुब्रमण्यम ने डिजिटल तकनीक के तेजी से बढ़ते प्रभाव पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक जनमत को प्रभावित करने, लोगों की सोच को आकार देने और उनकी गतिविधियों पर निगरानी रखने में सक्षम है।
डिजिटल युग में व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा, निजता और स्वतंत्र अभिव्यक्ति जैसे विषय मानवाधिकारों की दृष्टि से महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। ऐसे में तकनीकी विकास के साथ यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि नागरिकों के अधिकारों और स्वतंत्रता का उल्लंघन न हो।
बदलते समय के अनुरूप संस्थागत व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत
NHRC अध्यक्ष ने कहा कि मानवाधिकार संस्थाओं को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप अपनी कार्यप्रणाली और संस्थागत व्यवस्थाओं को मजबूत करना चाहिए। उन्होंने मानव गरिमा और स्वतंत्रता की रक्षा के प्रति इन संस्थाओं की प्रतिबद्धता को दोहराया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उभरती चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए मानवाधिकार संस्थाओं को अपनी कार्यक्षमता बढ़ाने और नए सामाजिक तथा तकनीकी मुद्दों के प्रति संवेदनशील रहने की आवश्यकता है।
मानवाधिकार संरक्षण में NHRC की भूमिका
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग मानवाधिकारों के उल्लंघन से संबंधित शिकायतों की जांच करने, संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगने और मानवाधिकार संरक्षण के लिए आवश्यक सिफारिशें करने का कार्य करता है। आयोग मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और मानवाधिकार संरक्षण से जुड़े कानूनी तथा नीतिगत उपायों को प्रोत्साहित करने में भी भूमिका निभाता है।
आयोग का 33वां स्थापना दिवस इस बात को रेखांकित करता है कि बदलते सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी परिवेश में मानवाधिकारों की सुरक्षा निरंतर प्रयासों की मांग करती है। व्यक्तिगत निजता, समानता, स्वतंत्रता और मानवीय गरिमा का संरक्षण सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
