बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तलाक की मांग करने वाले पति की अपील खारिज करते हुए कहा कि IPC की धारा 498A के मामले में पति का बरी होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि पत्नी ने झूठे आरोप लगाकर उसके साथ क्रूरता की है।
जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की डिवीजन बेंच ने लोकेश सिन्हा बनाम श्रीमती कुसुमलता सिन्हा एवं अन्य, FAM No. 133/2015 में 29 सितंबर 2026 को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि पति पत्नी के खिलाफ क्रूरता, परित्याग और व्यभिचार के आरोपों को ठोस साक्ष्यों से साबित करने में विफल रहा।
कोर्ट ने पाया कि पत्नी ने वैवाहिक संबंध बहाल करने के प्रयास किए थे, जबकि पति ने उसे वापस रखने से इनकार किया। कथित दूसरी शादी और व्यभिचार के आरोपों के समर्थन में भी पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट, राजनांदगांव के तलाक याचिका खारिज करने के फैसले को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी।
