छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक और सदस्य श्रीमती प्रियम्वदा सिंह जूदेव ने सोमवार को जशपुर कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में महिला उत्पीड़न एवं अन्य मामलों की सुनवाई की। प्रदेशभर में आयोजित सुनवाई के दौरान कुल 401 प्रकरणों पर विचार किया गया, जिनमें जशपुर जिले के 10 मामले शामिल थे।
सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण प्रकरण में आयोग ने छह वर्षों से सहजीवन में रह रहे एक युगल के विवाह की प्रक्रिया प्रारंभ कराने के निर्देश दिए। मामले में अनावेदक, जो वर्तमान में सेना में कार्यरत है, ने आवेदिका के साथ लंबे समय से रहने तथा उनसे एक पुत्री होने की बात स्वीकार की। आयोग के समक्ष आवेदिका ने एफआईआर दर्ज कराने के बजाय विधिवत विवाह कराने की इच्छा व्यक्त की, जिस पर अनावेदक ने भी सहमति जताई। आयोग ने महिला एवं बाल विकास विभाग को दोनों पक्षों के विवाह की प्रक्रिया शुरू कर दो माह के भीतर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही अनावेदक को प्रतिमाह 10 हजार रुपये भरण-पोषण राशि जमा कराने का आदेश दिया गया।
एक अन्य मामले में सीआरपीएफ में पदस्थ कर्मचारी पर पत्नी और दो बच्चों के भरण-पोषण की उपेक्षा करने का आरोप था। सुनवाई के दौरान कर्मचारी ने पत्नी और बच्चों के लिए हर माह 20 हजार रुपये भरण-पोषण राशि देने पर सहमति व्यक्त की। आयोग ने संरक्षण अधिकारी को मामले की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
भूमि विवाद से जुड़े एक प्रकरण में आयोग ने दोनों पक्षों को तहसीलदार के समक्ष सीमांकन कराने और वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार भूमि का कब्जा सुनिश्चित करने की सलाह दी। वहीं, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फरसाबहार में पदस्थ एक स्टाफ नर्स की आवास संबंधी शिकायत पर आयोग ने संबंधित विभाग को आवंटित शासकीय आवास की तत्काल मरम्मत कराने तथा मरम्मत अवधि के दौरान नियमानुसार मकान किराया भत्ता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
सुनवाई के दौरान कुछ मामलों का समाधान आपसी सहमति और समझौते के आधार पर किया गया। वहीं न्यायालय में लंबित एक मामले को आयोग ने सुनवाई योग्य नहीं मानते हुए बंद कर दिया। महिला आयोग ने सभी पक्षों से आपसी संवाद बढ़ाने, कानूनी प्रावधानों का पालन करने और महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण के प्रति जागरूक रहने की अपील की।
