प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गोवा में हुए कथित अवैध लौह अयस्क खनन और निर्यात से जुड़े बड़े धनशोधन मामले में सालगांवकर समूह और उससे संबद्ध एवीएस समूह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग ₹1,000 करोड़ मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है।
ईडी के अनुसार, कुर्क की गई संपत्तियों में भारत में स्थित 99 अचल संपत्तियां, सिंगापुर में स्थित 31 अचल संपत्तियां तथा भारतीय कंपनियों के इक्विटी शेयर शामिल हैं। एजेंसी का कहना है कि ये संपत्तियां कथित अवैध खनन से अर्जित धन से जुड़ी हुई हैं।
मामले की जांच गोवा सीआईडी अपराध शाखा द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू की गई थी। जांच में ईडी को पता चला कि एवीएस समूह ने वर्ष 2007 से 2012 के बीच गोवा में 10 खनन पट्टों का संचालन किया और इस दौरान अवैध रूप से लौह अयस्क का उत्खनन, बिक्री और निर्यात कर लगभग ₹2,492 करोड़ की अवैध आय अर्जित की।
जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि अवैध रूप से निकाले गए लौह अयस्क का निर्यात विदेशों में मौजूद शेल कंपनियों को वास्तविक मूल्य से काफी कम कीमत पर किया गया। इससे खनिज की वास्तविक बिक्री राशि छिपाई गई और अवैध कमाई को विदेशों में स्थानांतरित किया गया। ईडी के अनुसार, इस पूरे मामले में अपराध से अर्जित कुल आय लगभग ₹5,000 करोड़ तक पहुंचती है।
ईडी ने कहा है कि मामले की जांच अभी जारी है और अवैध खनन तथा धन शोधन के नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। यह कार्रवाई गोवा के बहुचर्चित खनन मामलों में अब तक की प्रमुख प्रवर्तन कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है।
