छत्तीसगढ़ का बैकुंठपुर जिला अपनी प्राकृतिक संपदा, ऐतिहासिक विरासत और खनिज संसाधनों के कारण राज्य के महत्वपूर्ण जिलों में गिना जाता है। यह जिला 22°56′ से 23°48′ उत्तरी अक्षांश तथा 81°56′ से 82°47′ पूर्वी देशांतर के बीच स्थित है। जिले की सीमाएं उत्तर-पश्चिम में मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले, दक्षिण में कोरबा जिले तथा पूर्व में सूरजपुर जिले से मिलती हैं। लगभग 5,977 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले इस जिले का लगभग 59.9 प्रतिशत हिस्सा घने वनों से आच्छादित है, जो इसे छत्तीसगढ़ के सबसे हरित क्षेत्रों में शामिल करता है।
बैकुंठपुर का भूभाग मुख्यतः पहाड़ी और पठारी स्वरूप का है। निचले पठारी क्षेत्र की औसत ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 550 मीटर है, जबकि सोनहत पठार जिले का सबसे ऊंचा क्षेत्र है, जिसकी ऊंचाई लगभग 755 मीटर तक पहुंचती है। यहां का मौसम सामान्यतः सुहावना रहता है तथा वर्षा, ग्रीष्म और शीत ऋतु स्पष्ट रूप से अनुभव की जाती हैं। यही कारण है कि यह क्षेत्र पूरे वर्ष अपेक्षाकृत आरामदायक जलवायु प्रदान करता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
बैकुंठपुर का इतिहास पूर्ववर्ती रियासतों से जुड़ा हुआ है। यह क्षेत्र ब्रिटिश भारत के दौरान कोरिया रियासत के नाम से प्रसिद्ध था, जबकि चांग भाखर भी इसी क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण रियासत थी। भारत की स्वतंत्रता के बाद 1 जनवरी 1948 को कोरिया और चांग भाखर रियासतों का भारतीय संघ में विलय हुआ और इन्हें तत्कालीन मध्यप्रदेश के सरगुजा जिले में शामिल किया गया।
बाद में प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत 25 मई 1998 को सरगुजा जिले से अलग कर कोरिया जिले का गठन किया गया। वर्ष 2022 में राज्य सरकार ने मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) को अलग जिला घोषित किया, जिसका औपचारिक शुभारंभ 9 सितंबर 2022 को हुआ। इसके बावजूद कई प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्थाएं अभी भी कोरिया जिले से संबद्ध हैं।
पर्यटन की दृष्टि से आकर्षण का केंद्र
बैकुंठपुर जिला प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों से समृद्ध है। यहां स्थित गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान वन्यजीव प्रेमियों और प्रकृति पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। यह राष्ट्रीय उद्यान जैव विविधता, वन्यजीव संरक्षण और पारिस्थितिक पर्यटन के लिए जाना जाता है।
मनेंद्रगढ़ क्षेत्र का अमृतधारा जलप्रपात अपनी मनमोहक प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के कारण पर्यटकों को आकर्षित करता है। वर्षा ऋतु में इसकी खूबसूरती और भी बढ़ जाती है।
पश्चिम चिरमिरी स्थित जगन्नाथ मंदिर क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। वहीं बैकुंठपुर का कोरिया पैलेस क्षेत्र की राजशाही विरासत और स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। यह महल आज भी जिले के गौरवशाली इतिहास की कहानी बयां करता है।
कोयला उत्पादन का प्रमुख केंद्र
बैकुंठपुर जिला खनिज संपदा, विशेष रूप से कोयले के विशाल भंडारों के लिए प्रसिद्ध है। जिले में कई महत्वपूर्ण कोयला क्षेत्र स्थित हैं, जिनका संचालन मुख्य रूप से दक्षिण पूर्वी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) द्वारा किया जाता है।
चिरमिरी कोलफील्ड जिले का सबसे प्रमुख कोयला क्षेत्र है, जहां चिरमिरी, कुरासिया, एनसीपीएच, कोरिया, डोमनहिल, गेल्होपानी और पश्चिम चिरमिरी जैसी प्रमुख खदानें संचालित हैं। यहां खुली और भूमिगत दोनों प्रकार की खनन पद्धतियों का उपयोग किया जाता है।
बैकुंठपुर कोलफील्ड में चरचा, पांडवपारा और कटकोना खदानें स्थित हैं, जो क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। इसके अतिरिक्त झगराखंड अथवा हसदेव कोलफील्ड में झगराखंड और हल्दीबाड़ी खदानें भी औद्योगिक गतिविधियों का आधार हैं।
हालांकि जिले में बड़े पैमाने का औद्योगीकरण सीमित है, लेकिन कोयला खनन और सेवा क्षेत्र स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बने हुए हैं। कोयला उत्पादन से जुड़े रोजगार और सहायक सेवाएं हजारों लोगों की आजीविका का प्रमुख स्रोत हैं।
विकास और संभावनाएं
प्राकृतिक संसाधनों, वन संपदा, पर्यटन स्थलों और खनिज भंडारों से समृद्ध बैकुंठपुर जिला छत्तीसगढ़ के विकास मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यदि पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और खनिज आधारित उद्योगों का संतुलित विकास किया जाए तो यह जिला आने वाले वर्षों में राज्य के प्रमुख आर्थिक और पर्यटन केंद्रों में शामिल हो सकता है।
