बिलासपुर, 19 अक्टूबर। तखतपुर न्यायालय ने 26 सितंबर 2026 को शिक्षक विवेक गुप्ता को महिला शिक्षिका से छेड़छाड़ और मारपीट के मामले में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। सजा के 24 दिन बाद भी उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई नहीं हुई है और वह शासकीय स्कूल में अपनी सेवाएं देता रहा।
दोषी शिक्षक विवेक गुप्ता बेलमुंडी स्कूल में पदस्थ है। न्यायालय के फैसले के बाद भी शिक्षक के नियमित रूप से स्कूल पहुंचने की जानकारी सामने आई है। स्कूल के प्रधान पाठक संजय कुमार विश्वकर्मा के अनुसार, शिक्षक 16 अक्टूबर को भी स्कूल में मौजूद था। प्रधान पाठक का कहना है कि शिक्षक ने उन्हें अदालत से मिली सजा के बारे में जानकारी नहीं दी थी।
दूसरी ओर, जिला शिक्षा अधिकारी संदीप पांडेय ने कहा कि उन्हें इस सजा की जानकारी नहीं थी। उन्होंने न्यायालय के आदेश की स्थिति का पता लगाकर प्राथमिकता से कार्रवाई करने की बात कही है।
अभियोजन के अनुसार, घटना 17 फरवरी 2018 को शासकीय प्राथमिक शाला चनाडोंगरी में हुई थी। वहां पदस्थ महिला शिक्षिका ने आरोप लगाया था कि विवेक गुप्ता ने उनका हाथ पकड़कर खींचा और सीने पर हाथ लगाया। विरोध करने पर उनके चरित्र को लेकर अपमानजनक बातें कहीं और मारपीट करते हुए उन्हें दीवार की ओर धकेल दिया, जिससे उनके चेहरे और सिर में चोटें आईं। मामले में तेजाब फेंकने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप भी लगाए गए थे।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ऋचा यादव की अदालत ने विवेक गुप्ता को भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत एक साल के सश्रम कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। धारा 323 के तहत भी एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। जुर्माना नहीं देने पर प्रत्येक धारा में एक-एक महीने का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतने का प्रावधान बताया गया है।
अदालत ने पीड़िता की गवाही, दूसरे गवाहों के बयान और मेडिकल साक्ष्यों पर विचार करने के बाद छेड़छाड़ और मारपीट के आरोप प्रमाणित पाए। वहीं, पीछा करने, अश्लील गाली-गलौज और आपराधिक धमकी के आरोपों में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने 7 अगस्त से 9 अक्टूबर 2018 तक न्यायिक अभिरक्षा में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित करने का निर्देश भी दिया।
कर्मचारी के आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने पर संबंधित सेवा नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए। छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 19 के तहत दोषसिद्धि के आधार पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
