बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की ग्राम पंचायत मढ़ईभाठा के सरपंच दिनानाथ जटवार को हटाने के आदेश पर बिलासपुर संभाग के कमिश्नर द्वारा लगाई गई अंतरिम रोक को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि जब हटाने का आदेश पहले ही लागू हो चुका हो और उसके बाद किसी अन्य व्यक्ति को अस्थायी सरपंच नियुक्त कर पदभार भी सौंप दिया गया हो, तो अंतरिम आदेश के जरिए पहले की स्थिति बहाल नहीं की जा सकती।
जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने यह फैसला भगवत प्रसाद रात्रे बनाम छत्तीसगढ़ राज्य एवं अन्य, WPC No. 4179/2026, 2026:CGHC:39117 में 7 सितंबर 2026 को सुनाया।
मामला दिनानाथ जटवार के खिलाफ पंचायत निधि की कथित अनियमित निकासी और दुरुपयोग तथा कथित फर्जी पंचायत प्रस्ताव के इस्तेमाल की शिकायत से जुड़ा था। जांच समिति ने पंचायत रिकॉर्ड, बैंक दस्तावेज और गवाहों के बयान की जांच के बाद 6 नवंबर 2025 को पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत कार्रवाई की अनुशंसा की। बाद में कलेक्टर की जांच में भी प्रथम दृष्टया मामला पाए जाने पर प्रकरण एसडीओ राजस्व एवं निर्धारित प्राधिकारी को भेजा गया।
निर्धारित प्राधिकारी ने सुनवाई के बाद धारा 40(1) के तहत दिनानाथ जटवार को सरपंच पद से हटा दिया और धारा 40(2) के तहत छह वर्ष के लिए पंचायत चुनाव लड़ने से अयोग्य कर दिया। जांच में 2.97 लाख रुपये की निकासी के लिए कथित तौर पर अलग प्रस्ताव और 63 हजार रुपये बिना वैध पंचायत प्रस्ताव के निकाले जाने का मामला भी सामने आया था। हाईकोर्ट ने इन आरोपों की अंतिम सत्यता पर कोई राय नहीं दी।
हटाने के बाद धारा 38 के तहत भगवत प्रसाद रात्रे को 22 जून 2026 को अस्थायी सरपंच नियुक्त किया गया और उन्होंने पदभार संभाल लिया। दिनानाथ जटवार ने कलेक्टर के समक्ष अंतरिम राहत मांगी, जिसे 25 जून को खारिज कर दिया गया। इसके बाद कमिश्नर के समक्ष पुनरीक्षण में कमिश्नर ने 6 जुलाई 2026 को 30 दिनों के लिए हटाने के आदेश पर रोक लगा दी।
हाईकोर्ट ने कमिश्नर के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि उसका व्यावहारिक प्रभाव हटाए जा चुके सरपंच को दोबारा पद पर लाने जैसा था। कोर्ट ने कहा, “इसका व्यावहारिक परिणाम उस स्थिति को फिर से बहाल करना होगा, जिसका अस्तित्व समाप्त हो चुका था।”
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के Public Services Tribunal Bar Association v. State of U.P., (2003) 4 SCC 104 और State of Uttar Pradesh v. Prem Chopra, (2024) 12 SCC 426 सहित फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अंतरिम राहत ऐसी नहीं होनी चाहिए, जो अंतिम कार्यवाही में मिलने वाली राहत का प्रभाव पैदा कर दे।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने दिनानाथ जटवार को हटाने के मूल आदेश की वैधता या उनके खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय नहीं दी है। अदालत ने कमिश्नर का अंतरिम आदेश रद्द करते हुए कलेक्टर द्वारा अंतरिम राहत खारिज करने के आदेश को बरकरार रखा और मामले की मुख्य कार्यवाही कानून के अनुसार रिकॉर्ड प्राप्त होने के चार महीने के भीतर, अधिमानतः, तय करने का निर्देश दिया है।
