BRICS Chief Justices’ Forum: CJI Surya Kant करेंगे सदस्य देशों के शीर्ष न्यायिक अधिकारियों से द्विपक्षीय वार्ता, न्यायिक सहयोग को मिलेगी नई दिशा

CJI Surya Kant

नई दिल्ली: भारत 4 से 6 सितंबर तक नई दिल्ली में BRICS Chief Justices’ Forum की मेजबानी करने जा रहा है। इस दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश Justice Surya Kant BRICS सदस्य देशों और साझेदार देशों के वरिष्ठ न्यायिक प्रतिनिधियों के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। उच्चस्तरीय न्यायिक सम्मेलन का उद्देश्य विभिन्न देशों की न्यायपालिकाओं के बीच सहयोग को मजबूत करना, तुलनात्मक कानूनी संवाद को बढ़ावा देना और न्यायिक संस्थाओं के बीच आपसी समझ को गहरा करना है।

BRICS देशों और साझेदार न्यायक्षेत्रों से कई प्रमुख न्यायिक अधिकारी इस मंच पर शामिल होंगे। इनमें रूस के Igor Krasnov, चीन के Zhang Jun, मिस्र के Boulos Gahmy Iskander Boulos, दक्षिण अफ्रीका की Mahube Betty Molemela, ईरान के Ayatollah Gholam Hossein Mohseni-Eje’i, इंडोनेशिया के Sunarto और संयुक्त अरब अमीरात के Mohammed Hamad Al Badi Al Dhaheri शामिल हैं। बेलारूस, कजाखस्तान और उज्बेकिस्तान जैसे साझेदार देशों के प्रतिनिधियों की भी भागीदारी प्रस्तावित है।

CJI Surya Kant की प्रस्तावित द्विपक्षीय वार्ताएं ऐसे समय में हो रही हैं जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न्यायिक सहयोग की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। सीमा-पार वाणिज्यिक विवाद, डिजिटल लेनदेन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा गवर्नेंस, निवेश संरक्षण, दिवालियापन और विदेशी न्यायिक आदेशों के प्रवर्तन जैसे मुद्दे अब केवल किसी एक देश की न्याय व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गए हैं।

BRICS न्यायिक मंच के माध्यम से इन साझा चुनौतियों पर विभिन्न न्यायिक प्रणालियों के अनुभवों और सर्वोत्तम प्रक्रियाओं का आदान-प्रदान संभव होगा। अदालतों के आधुनिकीकरण, न्यायिक प्रशासन में तकनीक के इस्तेमाल, न्याय तक पहुंच, न्यायिक प्रशिक्षण और सीमा-पार कानूनी सहयोग जैसे विषय भी चर्चा के महत्वपूर्ण क्षेत्र हो सकते हैं।

CJI Surya Kant हाल के दिनों में BRICS+ देशों के बीच अधिक संस्थागत न्यायिक सहयोग की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं। नई दिल्ली में आयोजित 11वें BRICS+ Legal Forum में उन्होंने BRICS+ Judicial Fellowship स्थापित करने का प्रस्ताव रखा था। इसके तहत करियर जजों को अन्य सदस्य देशों की अदालतों की कार्यप्रणाली और न्यायिक प्रक्रियाओं का अध्ययन करने के लिए अल्प अवधि के लिए वहां जाने का अवसर दिया जा सकता है।

उन्होंने एक साझा Jurisprudence Repository बनाने का विचार भी रखा था। इसका उद्देश्य विभिन्न देशों के महत्वपूर्ण फैसलों और न्यायिक रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से उपलब्ध कराना है, ताकि किसी समान कानूनी प्रश्न पर विचार करते समय एक देश की अदालत दूसरे देश के प्रासंगिक न्यायिक निर्णयों तक पहुंच सके।

CJI ने इस व्यापक अवधारणा को “Nyay Setu”, यानी न्याय का सेतु, के रूप में प्रस्तुत किया है। इसका उद्देश्य अलग-अलग संवैधानिक और कानूनी परंपराओं वाली न्यायपालिकाओं के बीच केवल औपचारिक संपर्क तक सीमित न रहकर नियमित तुलनात्मक अध्ययन, अनुभव साझा करने और संस्थागत विश्वास का एक मजबूत ढांचा विकसित करना है।

न्यायिक सहयोग का आर्थिक महत्व भी इस चर्चा का एक महत्वपूर्ण पहलू है। पूर्वानुमेय न्यायिक व्यवस्था, अनुबंधों का प्रभावी प्रवर्तन और संस्थागत स्थिरता अंतरराष्ट्रीय व्यापार तथा निवेश के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में न्यायपालिकाओं के बीच संवाद व्यापक rule of law framework और आर्थिक विश्वास को मजबूत करने में योगदान दे सकता है।

BRICS Chief Justices’ Forum में होने वाली द्विपक्षीय बैठकें इस व्यापक न्यायिक सहयोग को उच्चतम स्तर पर आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करेंगी। विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता, सीमा-पार विवाद, डिजिटल अर्थव्यवस्था, AI से जुड़े कानूनी प्रश्न, डेटा संरक्षण, जलवायु संबंधी मुकदमों और विदेशी फैसलों के प्रवर्तन जैसे क्षेत्रों में विभिन्न न्यायक्षेत्रों का तुलनात्मक अनुभव उपयोगी हो सकता है।

भारत द्वारा इस सम्मेलन की मेजबानी से Supreme Court of India को BRICS और साझेदार देशों की न्यायपालिकाओं के बीच बढ़ते संवाद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा। CJI Surya Kant की द्विपक्षीय वार्ताएं भारत के व्यापक संस्थागत और न्यायिक सहयोग प्रयासों का हिस्सा मानी जा रही हैं।

4 से 6 सितंबर तक होने वाला यह सम्मेलन केवल औपचारिक न्यायिक कूटनीति तक सीमित रहने के बजाय न्यायिक प्रशासन, तुलनात्मक कानून और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए दीर्घकालिक तंत्र विकसित करने पर केंद्रित हो सकता है। वैश्वीकरण और तकनीकी बदलाव के दौर में जब न्यायालयों के सामने सीमा-पार प्रभाव वाले विवाद तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे मंच विभिन्न देशों की न्यायपालिकाओं को साझा अनुभवों से सीखने और न्याय वितरण की प्रभावशीलता बढ़ाने का अवसर प्रदान करते हैं।