भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने राष्ट्रमंडल के 56 देशों से जलवायु परिवर्तन और जलवायु न्याय के मामलों में साझा न्यायिक दृष्टिकोण विकसित करने की अपील की है। लंदन के मार्लबोरो हाउस में आयोजित हाई-लेवल कॉमनवेल्थ पॉलिसी डायलॉग ऑन क्लाइमेट जस्टिस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक असर उन लोगों पर पड़ता है, जिनका इस संकट को पैदा करने में सबसे कम योगदान है।
CJI ने कहा कि छोटे किसान, मछुआरे और प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर समुदाय जलवायु संकट से सबसे पहले प्रभावित होते हैं। उन्होंने भारत के MC Mehta v. Kamal Nath और MK Ranjitsinh v. Union of India (2025) सहित अन्य देशों के मामलों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रमंडल देशों की अदालतों के बीच न्यायिक अनुभव साझा करने पर जोर दिया।
उन्होंने जलवायु परिवर्तन के कारण विस्थापित होने वाले लोगों के लिए मौजूदा कानूनी ढांचे को भी अपर्याप्त बताया। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि पर्यावरण कानून को अब सीमित विशेषज्ञ विषय नहीं रखा जा सकता और इसे कानूनी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
