सीजेआई सूर्यकांत बोले, न्यायालयों पर बढ़ता बोझ कम करने के लिए ADR को बनाएं पहली पसंद, भारत बने वैश्विक मध्यस्थता केंद्र

CJI Surya Kant Calls for Wider Use of ADR

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने न्यायालयों में लंबित मामलों के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) व्यवस्था को व्यापक स्तर पर अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।

सिंगापुर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर (एसआईएसी) के वार्षिक भारत सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि देश की अदालतों में इस समय पांच करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं। यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों की पीड़ा का प्रतीक है जो समय पर न्याय मिलने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केवल पारंपरिक अदालतों के माध्यम से बढ़ते मुकदमों का प्रभावी समाधान संभव नहीं है, इसलिए एडीआर को अंतिम विकल्प नहीं बल्कि विवाद समाधान का पहला विकल्प बनाया जाना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि एसआईएसी जैसी संस्थाएं भारत को अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक विवादों के समाधान के लिए विश्वसनीय केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और कम खर्चीला बनाया जाना चाहिए। संस्थागत मध्यस्थता न केवल विवादों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करती है, बल्कि व्यावसायिक संबंधों को भी बनाए रखती है और आर्थिक विकास को गति देती है।

सीजेआई सूर्यकांत ने न्यायिक व्यवस्था में व्यापक सुधारों की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं और कॉरपोरेट क्षेत्र से वाणिज्यिक अनुबंधों में मध्यस्थता संबंधी प्रावधान शामिल करने का आग्रह किया। साथ ही, विवाद समाधान प्रक्रिया में प्रौद्योगिकी के अधिक उपयोग, निर्णायक प्रक्रियाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और देश के कानूनी ढांचे को और मजबूत बनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी के भारत की न्याय प्रणाली तेज, सुलभ और विश्वसनीय होनी चाहिए।

अपने संबोधन के अंत में सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि न्यायालयों में लंबित मामलों को कम करना केवल न्यायपालिका की नहीं, बल्कि बार, बेंच और उद्योग जगत की भी साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी हितधारकों से मिलकर एक प्रभावी और मजबूत विवाद समाधान व्यवस्था विकसित करने का आह्वान किया।

इस सम्मेलन में न्यायाधीशों, विधि विशेषज्ञों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं, मध्यस्थों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा भारत की मध्यस्थता व्यवस्था को मजबूत बनाने और उसे अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता के पसंदीदा केंद्र के रूप में विकसित करने पर विचार-विमर्श किया।